रायपुर: साय सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर आज मध्य भारत का सबसे बड़ा और छत्तीसगढ़ सरकार को ‘माइंड समिट’ के तौर पर मंच प्रदान कर रहा है। इस समिट में हम छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों से जहां उनके दो साल के अनुभव पर चर्चा कर रहे हैं, तो वहीं आने वाले तीन सालों के लिए विकास और जनकल्याण के रोडमैप को भी जानने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके साथ ही हम आज बात कर रहे हैं विपक्ष के तौर पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से भी। अलग-अलग सेशन में हम रूबरू होंगे दिग्गज मंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से और जानेंगे कैसा रहा है छत्तीसगढ़ की साय सरकार का दो साल का कार्यकाल।
माइंड समिट के मंच पर प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव भी पहुंचे और उन्होंने IBC24 से प्रदेश में स्कूलों की व्यवस्था, स्कूल शिक्षा नीति, शिक्षकों की भर्ती, नए स्कूलों की शुरुआत, संचालन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
सरकारी स्कूल के टीचर्स के लिए सरकार की ट्रांसफर क्या होगी इस सवाल पर मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि, भर्ती पुलिस के अलावा स्कूलों से शिक्षकों का तबादला उसी स्थिति में होगा, जब वह स्कूल शिक्षकविहीन न हो। इस तरह यह स्पष्ट है कि, स्कूल में पर्याप्त शिक्षक होने पर ही किसी स्कूल से शिक्षक का ट्रांसफर किया जाएगा। युक्तियुक्तकरण के बाद से उनकी ट्रांसफर पुलिस और भी स्पष्ट है, साफ़ है।
आत्मनंद स्कूलों के प्रबंधन को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि पिछली सरकार ने इन स्कूलों का संचालन कलेक्टरों के भरोसे किया था। इन स्कूलों में भर्तियां भी खनिज न्यास मद (DMF) की राशि से की गई थीं। गजेंद्र यादव ने कहा कि जिन स्कूलों में डीएमएफ की पर्याप्त राशि उपलब्ध थी, वहां शिक्षकों के भुगतान में कोई समस्या नहीं आई, लेकिन कई ऐसे स्कूल भी थे जहां इस फंड की कमी थी या राशि आवंटित नहीं हो पाई। ऐसे में उन स्कूलों से शिक्षकों को हटाना पड़ा।
मंत्री यादव ने बताया कि मौजूदा सरकार ने ऐसे स्कूलों को पीएम श्री स्कूलों के रूप में शामिल किया है। जहां तक भर्तियों का सवाल है, आज भी इन स्कूलों में नियुक्तियां की जा रही हैं और यह प्रक्रिया जिला स्तर पर ही संचालित की जा रही है। इन शिक्षकों के वेतन का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने दौरों के दौरान इन स्कूलों का भी निरीक्षण करें और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लें। स्कूलों के प्रबंधन को मजबूत करने के लिए डीईओ, बीईओ और बीआरसी अधिकारियों की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्हें लगातार स्कूलों का दौरा करने और व्यवस्थागत समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए गए हैं

