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प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, समूह या समिति के माध्यम से नियोजित, जॉबदर, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, मानदेय एवं अंशकालीन कर्मचारी बीते पाँच वर्षों से लेकर 25–30 वर्षों तक किसी न किसी रूप में शासन की जनहितकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद इन्हें आज भी “अनियमित कर्मचारी” जैसे शब्दों से तिरस्कृत किया जा रहा है। इन कर्मचारियों की स्थिति वर्तमान में मध्यकालीन बंधुआ मजदूरों से भी बदतर बताई जा रही है। पारिवारिक जिम्मेदारियों, आर्थिक असुरक्षा, बेरोजगारी और प्रशासनिक दबाव के चलते ये कर्मचारी अपने साथ हो रहे अन्याय को सहने के लिए मजबूर हैं।
छत्तीसगढ़ प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण एवं स्थायीकरण, सेवा से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली, न्यून मानदेय कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिए जाने, अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किए जाने तथा आउटसोर्सिंग, ठेका, सेवा प्रदाता एवं समूह-समिति के माध्यम से नियोजन प्रणाली को समाप्त करने की मांग को लेकर 28 दिसंबर 2025 को तूता, नवा रायपुर में एक दिवसीय जंगी प्रदर्शन का आयोजन किया गया।
इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से हजारों कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ बिहान संयुक्त कैडर एवं कर्मचारी कल्याण संघ, ट्यूटर शिक्षक संघ मोहला-मानपुर, पोटाकेबिन अनुदेशक एवं भृत्य कर्मचारी संगठन, शिक्षा मितान एवं कृषि शिक्षक संघ बीजापुर, छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ, छत्तीसगढ़ विद्युत ठेका श्रमिक विकास संगठन, छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक संघ, सर्वविभागीय दैनिक श्रमिक कल्याण संघ, शासकीय औपचारिकतर शिक्षक संघ, छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ शासकीय आईटीआई सुरक्षा गार्ड संघ, किसान मित्र संघ, मेकाहारा कर्मचारी कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं (फायर ब्रिगेड) कर्मचारी संघ तथा छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी प्रकोष्ठ संघ सहित अनेक संगठनों के कर्मचारी शामिल रहे।
प्रदर्शनकारियों ने शासन से मांग की कि वर्षों से सेवाएं दे रहे अनियमित कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त किया जाए और उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय लिया जाए।

