सरगुजा। जिले में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत जारी तबादला एवं पदस्थापना आदेशों का पालन नहीं करने पर शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। निर्धारित विद्यालयों में ज्वाइनिंग नहीं देने वाले 10 सहायक शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी ने निलंबित कर दिया है। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन माना है।
सरगुजा जिले में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान अतिशेष पाए गए सहायक शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में पदस्थ किया गया था। शिक्षा विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि संबंधित शिक्षक अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर तत्काल ज्वाइनिंग देकर अध्ययन-अध्यापन कार्य प्रारंभ करें। इसके बावजूद कुछ शिक्षकों द्वारा आदेशों की अवहेलना की गई, जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए 10 सहायक शिक्षकों को निलंबित कर दिया।
डीईओ द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के विपरीत पाया गया है। शासकीय आदेशों का पालन नहीं करना और शैक्षणिक कार्य में बाधा उत्पन्न करना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है, इसलिए निलंबन की कार्रवाई आवश्यक मानी गई।
जानकारी के अनुसार, युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कुछ शिक्षकों ने संभाग स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किए थे। समिति द्वारा सभी मामलों की सुनवाई की गई, जिसमें कुछ अभ्यावेदनों को स्वीकार किया गया, जबकि अधिकांश मामलों में समिति ने तबादला आदेशों को सही ठहराया। समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिन शिक्षकों के अभ्यावेदन निरस्त किए गए हैं, वे अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर अनिवार्य रूप से ज्वाइनिंग दें।
समिति के निर्णय के बावजूद कुछ शिक्षकों द्वारा ज्वाइनिंग नहीं दी गई। इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा पांच शिक्षकों को निलंबित किया जा चुका है। अब डीईओ स्तर पर 10 और शिक्षकों पर कार्रवाई होने से शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।
निलंबित किए गए सहायक शिक्षकों में गीता चौधरी (प्राथमिक शाला रिखीमुंडा), अजय कुमार मिश्रा (प्राथमिक शाला बांधपारा), सीमा सोनी (प्राथमिक शाला चठीरमा), अल्पना गुप्ता (प्राथमिक शाला हर्राटिकरा), मधु गुप्ता (प्राथमिक शाला बिसुनपुर) और भीष्म सिंह (प्राथमिक शाला मुड़ापारा सहित अन्य शिक्षक शामिल हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आदेशों की अवहेलना जारी रहने पर अन्य शिक्षकों पर भी आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के खिलाफ बड़ी संख्या में शिक्षकों ने बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। हाई कोर्ट के निर्देश पर जिला एवं संभाग स्तरीय समितियों द्वारा सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद ज्वाइनिंग नहीं देना अब विभाग की नजर में स्पष्ट अनुशासनहीनता माना जा रहा है। शिक्षा विभाग का कहना है कि शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए आदेशों का पालन अनिवार्य है।

