रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने महान जनजातीय क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में एक चौक का नामकरण करने और उनकी प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की। इसके साथ ही चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार तथा बालोद, कांकेर और बस्तर जिलों में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण के लिए प्रत्येक स्थान पर 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण और चपका बस्तर में श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय धरती सदैव वीरों और क्रांतिकारियों की भूमि रही है। शहीद गैंदसिंह ने वर्ष 1825 में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहादत दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिनमें वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर और शहीद गैंदसिंह जैसे महान नायकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने नागरिकों से अपील की कि नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम का अवलोकन अवश्य करें, जहां छत्तीसगढ़ की सभी जनजातीय क्रांतियों का सचित्र विवरण और ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ में भी नेतृत्व जनजातीय समाज के हाथों में है। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन हुआ, जिससे जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा मिली।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शिक्षा, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की जानकारी दी और युवाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने बस्तर अंचल में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार और सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने भी शहीद गैंदसिंह के संघर्ष और छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय नायकों के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

