📰 Mahashivratri 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र और शुभ पर्वों में से एक है। यह फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने अनंत ज्योतिर्लिंग रूप धारण किया था और माता पार्वती के साथ उनका दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं।
📅 कब है महाशिवरात्रि 2026?
वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत रविवार, 15 फरवरी 2026 को रखा जाएगा।
द्रिक पंचांग के अनुसार —
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी, शाम 5:04 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी, शाम 5:34 बजे
- व्रत तिथि: 15 फरवरी
- पारण समय: 16 फरवरी, सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक
🕉️ पूजा के विशेष मुहूर्त
🌙 निशीथ काल (सबसे शुभ समय)
- 16 फरवरी रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक
इस समय की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है।
🔔 चार प्रहर पूजा समय:
- पहला प्रहर – शाम 6:11 से रात 9:23 बजे
- दूसरा प्रहर – रात 9:23 से 12:35 बजे
- तीसरा प्रहर – रात 12:35 से सुबह 3:47 बजे
- चौथा प्रहर – सुबह 3:47 से 6:59 बजे
💧 जलाभिषेक के शुभ समय
- सुबह 6:11 से 7:47 बजे
- 8:24 से 9:48 बजे
- 9:48 से 11:11 बजे
- 11:11 से 12:35 बजे
🪔 पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, मिश्री) से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और सफेद पुष्प अर्पित करें।
- दीप प्रज्वलित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ एवं महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- रात्रि जागरण करें और शिव कथा का श्रवण करें।
🧾 पूजन सामग्री
बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग, दीपक, चंदन, रोली, अक्षत, सुपारी, नारियल, फल और मिठाई।
इस दिन तामसिक भोजन, मांस और मदिरा से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
⭐ इस बार बन रहे विशेष योग
महाशिवरात्रि 2026 पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें —
शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधादित्य राजयोग, लक्ष्मी नारायण राजयोग और चतुर्ग्रही योग शामिल हैं। इन योगों में की गई पूजा और जप का विशेष फल मिलता है।
📖 महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा
मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था, जिससे वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। भक्त इस दिन रात्रि जागरण कर उसी त्याग और करुणा की स्मृति में शिव आराधना करते हैं।
देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में इस दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन और अभिषेक के लिए उमड़ते हैं।
हर-हर महादेव! जय भोलेनाथ! 🔱

