छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे भ्रष्टाचार का बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश को आगे ले जाने वाली गति का नहीं, बल्कि प्रदेश की दुर्गति करने वाला बजट है। उनके अनुसार बजट में शब्दों का मायाजाल रचा गया है और युवाओं व महिलाओं को केवल झुनझुना थमाया गया है।
संवेदनशील क्षेत्रों के संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी का आरोप
डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि सरकार बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों को उद्योगपति मित्रों को सौंपने की तैयारी में है। उन्होंने जगदलपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरी तरह निर्मित भवन को बुनियादी ढांचे सहित एक निजी एजेंसी को किराए पर देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि बजट में घोषित दो नई एजुकेशन सिटी भी निजीकरण की भेंट चढ़ सकती हैं।
पिछली घोषणाओं पर अमल न होने का मुद्दा उठाया
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले बजट में एम्स की तर्ज पर चार सिम्स और आईआईटी की तर्ज पर चार सीआईटी खोलने की घोषणा की गई थी, लेकिन एक साल में इस दिशा में कोई ठोस काम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के पद खाली हैं, जबकि नई घोषणाएं की जा रही हैं। रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में करोड़ों की मशीनें तकनीशियन के अभाव में बेकार पड़ी होने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा का आरोप
डॉ. महंत ने कहा कि बजट में ग्रामीण इलाकों की अनदेखी की गई है। उनके अनुसार पूरा बजट भाषण रायपुर और नवा रायपुर की सड़कों तक सीमित रहा और गांवों की सड़कों का जिक्र तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के जिले के स्कूल भी शामिल हैं, लेकिन भर्ती को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।
बेरोजगारों और महिलाओं के लिए ठोस प्रावधान नहीं
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षित बेरोजगारों के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है। महतारी वंदन योजना से जुड़ी महिलाएं लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रही। उनके अनुसार बजट में महिलाओं और युवाओं को रोजगार के नाम पर केवल आश्वासन दिया गया है।
केंद्र की योजनाओं पर चुप्पी का आरोप
डॉ. महंत ने कहा कि बजट भाषण में प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस जैसे मुद्दों पर स्पष्टता नहीं दी गई। उन्होंने इसे कैरिड-फॉरवर्ड स्कीम बताते हुए कहा कि जनता की समस्याओं का ठोस समाधान इस बजट में नजर नहीं आता।
अंत में नेता प्रतिपक्ष ने बजट को संकल्प का दस्तावेज मानने से इनकार करते हुए इसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला करार दिया और कहा कि इसमें आम जनता के लिए कोई ठोस विकल्प दिखाई नहीं देता।

