रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने जमीन विवादों के समाधान को आसान और तेज बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2026 को मंजूरी दे दी है, जिससे अब आम लोगों और किसानों को लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत अब एसडीएम स्तर पर जमीन विवाद का समाधान नहीं होने पर अपील सीधे जिला कलेक्टर के पास की जा सकेगी। पहले ऐसे मामलों में लोगों को संभागीय कमिश्नर कार्यालय तक जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी।
सरकार के इस फैसले से ग्रामीण इलाकों के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। पहले कई ग्रामीणों को 30 से 50 किलोमीटर दूर संभाग मुख्यालय तक जाना पड़ता था, लेकिन अब जिले में ही सुनवाई पूरी हो सकेगी।
संशोधित कानून के अनुसार जमीन विवाद से जुड़े मामलों का निपटारा 30 से 90 दिनों के भीतर करना अनिवार्य किया गया है। इससे वर्षों से लंबित मामलों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी है। यदि सुनवाई में अनावश्यक देरी हुई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
वहीं संशोधित धारा 59 के तहत औद्योगिक उपयोग की जमीनों को पुनर्मूल्यांकन से छूट दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रशासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि नए कानून के अनुसार लंबित मामलों की सूची तैयार कर सुनवाई प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

