रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबीजी-रामजी)’ योजना ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड स्थित ग्राम खोटलापाल में योजना के तहत निर्मित डबरी (छोटा तालाब) ने एक किसान की जिंदगी बदल दी है।
ग्राम खोटलापाल के किसान सोनधर की भूमि पर बनाई गई डबरी से अब वर्षा जल का प्रभावी संचयन हो रहा है। पहले बारिश का पानी बह जाता था और गर्मियों में सिंचाई के लिए परेशानी होती थी, लेकिन अब खेतों को समय पर पर्याप्त पानी मिल रहा है। इससे किसान अतिरिक्त फसल लेने में सक्षम हुए हैं और खेती की उत्पादकता भी बढ़ी है।
डबरी निर्माण का लाभ केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहा। किसान सोनधर अब इसमें मछली पालन भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। भविष्य में बतख पालन शुरू करने की भी योजना है, जिससे उनकी आजीविका के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही पानी की उपलब्धता बढ़ने से पशुपालन और बाड़ी (सब्जी उत्पादन) जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
इस परियोजना का सकारात्मक असर पूरे गांव पर देखने को मिल रहा है। डबरी के कारण आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर बेहतर हुआ है, जिससे कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता बढ़ी है। खेतों में नमी बनी रहने से आसपास के किसानों को भी लाभ मिल रहा है।
डबरी निर्माण के दौरान ग्राम पंचायत के जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला, जिससे पलायन पर भी रोक लगी। यह मॉडल जल संरक्षण, रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
राज्य सरकार का मानना है कि जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ऐसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


