रायपुर, 20 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला औषधीय एवं सुगंधीय फसलों की खेती के जरिए देशभर के लिए मिसाल बनकर उभरा है। राज्य सरकार की पहल से महिलाओं को सिंदूरी, सतावर, अश्वगंधा, खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसे औषधीय पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे अनुपयोगी जमीन भी आय का बड़ा स्रोत बन रही है।
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा रायपुर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित इस योजना के तहत महिलाओं को औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। धमतरी जिले में कई महिलाओं ने बेकार पड़ी भूमि और यहां तक कि नाले के पानी का उपयोग कर औषधीय खेती शुरू की है। इससे बंजर जमीन हरी-भरी होने के साथ उनकी आमदनी भी कई गुना बढ़ी है।
150 एकड़ से शुरू हुई सफलता की कहानी
वर्ष 2025 में कलेक्टर अविनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से इस अभियान की शुरुआत की। पहले चरण में 150 एकड़ भूमि पर 200 महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़कर खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली की खेती कराई गई।
राज्य औषधीय पादप बोर्ड ने गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और 100 प्रतिशत बाय-बैक व्यवस्था उपलब्ध कराई, जिससे महिलाओं और किसानों को अपने उत्पाद बेचने की चिंता नहीं करनी पड़ी।
बंजर जमीन से लाखों की कमाई
इस पहल का परिणाम यह रहा कि जो जमीन पहले अनुपयोगी मानी जाती थी, वहीं से अब प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। महिलाएं इस आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, कृषि उपकरण खरीदने और छोटे व्यवसाय शुरू करने में कर रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई गति
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार और बाजार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी सोच के तहत ‘लखपति दीदी’ अभियान को गति देने के लिए औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब इस मॉडल का विस्तार 500 एकड़ तक करने और 500 से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
धमतरी के इस मॉडल को 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित महाकुंभ-2025 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि जागरण द्वारा राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया। इसके बाद हैदराबाद, बिहार, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों के किसान और अधिकारी इस मॉडल का अध्ययन करने धमतरी पहुंच रहे हैं।
खेती से आगे, वैल्यू चेन पर फोकस
धमतरी मॉडल की खासियत केवल खेती तक सीमित नहीं है। कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है। भविष्य में प्रोसेसिंग, आवश्यक तेल निष्कर्षण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन के लिए भी कार्य किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। धमतरी का औषधीय खेती मॉडल आज विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान बनकर पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।


