रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पशुपालन को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुंगेली जिले में पशुधन विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उपचार, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, रोग नियंत्रण और गांव-गांव आयोजित पशु स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है, बल्कि दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. आर.एम. त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2025-26 में जिले में 67,257 पशुओं का उपचार, 1,22,804 पशुओं को औषधि वितरण, 93,561 पशुओं का कृमिनाशन तथा 1,09,084 पशुओं की डिटिकिंग की गई। इन सेवाओं का लाभ हजारों पशुपालकों को मिला।
नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत 9,978 निकृष्ट सांडों का बंधियाकरण किया गया, जबकि 20,341 गाय एवं भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। इसके परिणामस्वरूप 5,685 उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म हुआ, जिनमें 2,900 से अधिक मादा बछियां शामिल हैं। इससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ने और पशुपालकों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की लिंग वर्गीकृत वीर्य योजना के तहत 123 गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया, जिससे 99 मादा बछियों का जन्म हुआ। इसे जिले में उच्च उत्पादक पशुधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
पशुओं को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए जिले के 2,59,348 पशुधन में 7,67,531 टीके लगाए गए। इनमें लम्पी स्किन डिजीज, खुरहा-चपका, गलघोंटू, एकटंगिया, इंटरोटॉक्सीमिया और पीपीआर जैसी बीमारियों से बचाव के टीके शामिल हैं। इसके अलावा 881 बछियों का ब्रुसेलोसिस टीकाकरण और 4,063 पशुओं को एंटी रेबीज वैक्सीन भी लगाई गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए जिले में 582 बहुउद्देशीय पशु स्वास्थ्य एवं टीकाकरण शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में उपचार, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी देकर किसानों को आधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया गया।
पशुधन विकास विभाग का मानना है कि इन योजनाओं से पशुपालन को नई दिशा मिली है और आने वाले समय में यह ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।


