रायपुर। बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य बाल संरक्षण समिति के निर्देशन में जिला बालोद के विकासखंड गुंडरदेही स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इरागुड़ा में मिशन वात्सल्य एकीकृत बाल संरक्षण सेवाएं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
बच्चों को POCSO और बाल अधिकारों की दी जानकारी
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम 2012, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 और बाल अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
इसके अलावा बच्चों को गुड टच-बैड टच, साइबर अपराध से बचाव और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में भी जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी प्रकार के शोषण, हिंसा, उत्पीड़न, ऑनलाइन धोखाधड़ी या संकट की स्थिति में बच्चे किस तरह सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
सुरक्षित व्यवहार और डिजिटल सुरक्षा पर जोर
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सुरक्षित व्यवहार, आत्म-सुरक्षा और डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें समझाया गया कि संदिग्ध परिस्थितियों में घबराने के बजाय तुरंत भरोसेमंद वयस्कों और संबंधित सहायता सेवाओं से संपर्क करना चाहिए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों और उपलब्ध सुरक्षा तंत्र के प्रति सजग बनाना था।
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने दी व्यवहारिक जानकारी
कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्य सुषमा पटेल, समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, मास्टर ट्रेनर सुमन देवांगन और गोकुल राम यादव उपस्थित रहे।
चाइल्ड हेल्पलाइन की ओर से परियोजना समन्वयक वेदप्रकाश साहू, केस वर्कर कैलाश निषाद एवं हेमशंकर निर्मलकर ने बच्चों को व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी दी।
वहीं जिला बाल संरक्षण इकाई से आउटरीच वर्कर नूतन नेताम ने बाल संरक्षण सेवाओं और सहायता प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताया।
270 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
जागरूकता कार्यक्रम में 118 बालक और 152 बालिकाओं सहित कुल 270 विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। विद्यार्थियों ने बाल सुरक्षा, कानूनी संरक्षण और साइबर जागरूकता से जुड़े विषयों पर उत्साहपूर्वक सवाल पूछे और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
बाल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण पहल
राज्य शासन द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य बच्चों के समग्र विकास, सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ समाज में बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत कर रहे हैं।


