रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले 44 साल से चल रहे महानदी जल विवाद का फैसला अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 13 जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही विवाद पर अगले छह महीने में फैसला आने की संभावना बढ़ गई है।
इस अवधि में ट्रिब्यूनल को शेष प्रक्रिया पूरी कर अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी है।
1983 में शुरू हुआ था विवाद
महानदी जल विवाद की शुरुआत वर्ष 1983 में तत्कालीन मध्यप्रदेश और ओडिशा के बीच हुई थी। राज्य पुनर्गठन के बाद यह विवाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच प्रमुख अंतरराज्यीय जल विवाद बन गया।
वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के गठन के बाद दोनों राज्यों ने हजारों पन्नों के दस्तावेज, जल उपलब्धता के आंकड़े, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों से संबंधित ब्यौरा तथा तकनीकी रिपोर्टें प्रस्तुत कीं।
दोनों राज्यों की दलीलें लगभग पूरी
ट्रिब्यूनल की टीम ने रायपुर, बिलासपुर, कोरबा सहित दोनों राज्यों की प्रमुख परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण भी किया है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रिब्यूनल के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें लगभग पूरी हो चुकी हैं। अब शेष प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जानी है।
अंतिम फैसले की तैयारी माना जा रहा कार्यकाल विस्तार
ट्रिब्यूनल के कार्यकाल को 13 जनवरी 2027 तक बढ़ाए जाने को केवल औपचारिक विस्तार नहीं माना जा रहा है। इसे विवाद पर अंतिम निर्णय की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
अगले छह महीने में ट्रिब्यूनल शेष प्रक्रिया पूरी कर अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप सकता है।
दोनों राज्यों में भाजपा सरकार होने की भी चर्चा
विवाद के जल्द समाधान की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ और ओडिशा के साथ केंद्र में भी भाजपा की सरकार है।
बताया जाता है कि इससे पहले ओडिशा में बीजद की सरकार थी, जबकि छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकारें रही हैं। राजनीतिक परिस्थितियों के चलते विवाद के समाधान में कठिनाइयां आने की बात कही जाती रही है।
अब दोनों राज्यों और केंद्र में एक ही दल की सरकार होने को विवाद पर जल्द निर्णय की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।


