रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन का सुशासन तिहार जनता की समस्याओं के समयबद्ध समाधान और शासन-प्रशासन के प्रति जनविश्वास मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य शासन को गांवों और शहरों के द्वार तक पहुंचाकर आम लोगों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना रहा।
सुशासन का अर्थ केवल सरकारी योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसा लोक-केंद्रित (People-Centric), पारदर्शी (Transparent) और जवाबदेह (Accountable) शासन स्थापित करना है, जिसमें जनता की आवाज सर्वोपरि हो।
समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा प्रशासन
सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। बस्तर के आयतु, सरगुजा के तिहारू और धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के ईतवारी राम कमार जैसे ग्रामीणों को भी अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखने का अवसर मिला।
ग्रामीणों ने गांव की चौपाल में हैंडपंप, तालाब में घाट, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी भवन, पहुंच मार्ग, बिजली लाइन, मध्यान्ह भोजन और स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति जैसी जरूरतों को लेकर अपनी बात रखी।
1 मई से 10 जून तक चला अभियान
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में इस वर्ष पूरे प्रदेश में 1 मई से 10 जून 2026 तक सुशासन तिहार संचालित किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर शिविर आयोजित किए गए।
मुख्यमंत्री ने कई स्थानों पर अचानक ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। ग्रामीणों ने भी मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर सहजता से अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं बताईं।
33 जिलों के 146 विकासखंडों में अभियान
सुशासन तिहार के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों में अधिकारियों और कर्मचारियों के अभियान दल गठित किए गए। इन दलों ने गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से चौपाल में उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ली।
अभियान के दौरान अधिकारी-कर्मचारी गांवों में रात में भी रुके और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद किया। इससे शासन और जनता के बीच संवाद का प्रभावी माध्यम तैयार हुआ।
सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की हुई समीक्षा
अभियान के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की जमीनी स्थिति की समीक्षा की गई। विशेष रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अंत्योदय अन्न योजना, खाद्यान्न के भंडारण और वितरण की स्थिति तथा मानसून से पहले दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं के भंडारण की समीक्षा की गई।
इसके साथ ही BPL श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अमृत नमक वितरण की स्थिति भी देखी गई।
मजदूरी भुगतान और राजस्व मामलों पर भी फोकस
सुशासन तिहार के दौरान महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) तथा अन्य रोजगारमूलक कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इनमें कार्यरत श्रमिकों के मजदूरी भुगतान की स्थिति भी जांची गई।
राजस्व मामलों में अविवादित नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की गई।
पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समीक्षा
अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था और जलस्रोतों की साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया गया। इसके अलावा विद्युत व्यवस्था, ट्रांसफार्मर एवं बिजली लाइनों के रखरखाव, कृषि पंपों के विद्युतीकरण और एकल बत्ती कनेक्शन से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं, पेंशन, निराश्रित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की स्थिति का भी जायजा लिया गया।
सुशासन का उद्देश्य जनता का विश्वास मजबूत करना
सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य शासन को जनता के करीब लाना और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना रहा। मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री, प्रभारी सचिव, अधिकारी-कर्मचारी और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी से अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचाने का अवसर मिला।
सरकार की इस पहल का प्रमुख संदेश यही रहा कि सुशासन वही है, जिसमें सरकार जनता तक पहुंचे, उसकी समस्याएं सुने और समय पर समाधान सुनिश्चित करे।


