रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और जैव विविधता के कारण पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर की वास्तविक पहचान देश-दुनिया के सामने पूरी तरह नहीं आ सकी, लेकिन अब शांति और विकास के नए वातावरण में बस्तर को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में लेह-लद्दाख के अध्ययन एवं एक्सपोजर विजिट से लौटे पत्रकारों से मुलाकात के दौरान यह बात कही। उन्होंने पत्रकारों से उनके भ्रमण के अनुभव जाने और बस्तर के पर्यटन विकास में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की।
प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है बस्तर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर प्रकृति की अनुपम देन है। यहां घने जंगल, जलप्रपात, नदियां, पहाड़ और गुफाओं के साथ-साथ विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, लोककला, हस्तशिल्प, खान-पान और परंपराएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर की इन विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।
नक्सलवाद की पहचान से आगे बढ़ रहा बस्तर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार दशकों में राष्ट्रीय मीडिया में बस्तर का उल्लेख अधिकतर नक्सलवाद और हिंसा की घटनाओं के संदर्भ में होता रहा, जिससे क्षेत्र की वास्तविक पहचान पीछे छूट गई। अब नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलता और शांति के वातावरण से बस्तर के विकास के नए रास्ते खुले हैं।
सड़क, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर को अब नक्सलवाद के लिए नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और विकास के लिए जाना जाना चाहिए।
पर्यटन से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन केवल किसी क्षेत्र की पहचान बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण आधार भी है।
बस्तर में पर्यटन बढ़ने से—
- होटल और होम-स्टे
- परिवहन
- स्थानीय खान-पान
- हस्तशिल्प
- गाइड सेवाएं
- स्थानीय उत्पादों की बिक्री
जैसे क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसका विशेष लाभ स्थानीय युवाओं और महिलाओं को मिल सकता है। साथ ही बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलने की संभावना है।
लेह-लद्दाख से सीखने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने लेह-लद्दाख का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राकृतिक और भौगोलिक रूप से विशिष्ट क्षेत्रों में सुव्यवस्थित पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है।
लेह-लद्दाख के अध्ययन भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने पर्यटन प्रबंधन, स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन आधारित आजीविका के विभिन्न पहलुओं को करीब से देखा। मुख्यमंत्री ने इन अनुभवों को बस्तर के पर्यटन विकास के लिए उपयोगी बताया।
मीडिया निभा सकता है महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों से कहा कि बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती और वहां हो रहे सकारात्मक बदलावों को देश के सामने लाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से बस्तर की प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन स्थलों और विकास की सकारात्मक कहानियां सामने आएंगी, तो देश के लोगों की बस्तर के प्रति धारणा भी बदलेगी।
सरकार का प्रयास है कि देश-दुनिया के पर्यटक बिना भय के बस्तर आएं, यहां की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट संस्कृति को करीब से देखें और एक नए एवं बदलते बस्तर का अनुभव लेकर लौटें।
इस अवसर पर पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के साथ लेह-लद्दाख अध्ययन भ्रमण के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित अन्य पत्रकार उपस्थित रहे।


