बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने हजारों जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने को साकार किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से अब तक जिले में 6 हजार 968 आवास पूर्ण किए गए हैं। इन सभी आवासों का 11 सितंबर को जिलेभर में सामूहिक गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सौंपी गई चाबियां
जिले के सभी विकासखंडों में पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना एवं पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ हितग्राही परिवारों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपी गईं।
कच्चे मकानों और झोपड़ियों में लंबे समय से जीवन बिता रहे परिवारों के लिए अपने पक्के घर में प्रवेश का यह अवसर खुशी और भावुकता से भरा रहा।
रामचन्द्रपुर में सबसे ज्यादा आवास पूर्ण
विकासखंडवार आंकड़ों के मुताबिक रामचन्द्रपुर में 2,276, वाड्रफनगर में 1,772, कुसमी में 1,215, बलरामपुर में 1,142, राजपुर में 353 और शंकरगढ़ में 210 पक्के आवास पूर्ण कराए गए हैं।
पक्का आवास सुरक्षा और सम्मान का आधार
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने गृह प्रवेश करने वाले सभी हितग्राही परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि पक्का आवास केवल ईंट-गारे का ढांचा नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुरक्षा, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य का मजबूत आधार है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र परिवार को तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण आवास मिले और शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने हितग्राहियों को अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए भी प्रेरित किया।
शेष आवासों को जल्द पूरा करने के निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों को शेष स्वीकृत आवासों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही आगामी सेवा संकल्प अभियान की तैयारियां भी समय पर सुनिश्चित करने को कहा।
हितग्राहियों ने जताया आभार
नए पक्के घर मिलने पर हितग्राही परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। परिवारों ने कहा कि पक्के घर का सपना पूरा होने से उन्हें सुरक्षा और सम्मान का अनुभव हो रहा है।
पक्की छत मिलने से खुश परिवारों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित शासन-प्रशासन के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रशासन ने शेष स्वीकृत आवासों को जल्द और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


