ओपेरा और मनोरंजन कार्यक्रम की आड़ में हुए अश्लील नृत्य मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। मैनपुर के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) तुलसीदास मरकाम को रायपुर संभाग के आयुक्त महादेव कावरे ने शुक्रवार को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अपर कलेक्टर द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।
इससे पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद एसडीएम को गरियाबंद कलेक्ट्रेट में अटैच किया गया था, लेकिन मामले की गंभीरता और जन आक्रोश को देखते हुए इसे अपर्याप्त मानते हुए अब निलंबन की कार्रवाई की गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे आपत्तिजनक वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एसडीएम तुलसीदास मरकाम को अश्लील नृत्य देखते हुए, बार बालाओं के साथ झूमते, खुलेआम पैसे उड़ाते और अशोभनीय हरकतें करते देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी, नैतिकता और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
रुमाल गांव में हुआ था आयोजन
पूरा मामला मैनपुर विकासखंड के रुमाल गांव का है, जहां ओपेरा और सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर एक आयोजन किया गया था। आयोजकों ने इसे सांस्कृतिक कार्यक्रम बताकर प्रशासन से अनुमति ली थी, लेकिन कार्यक्रम शुरू होते ही यह अश्लील नृत्य और फूहड़ मनोरंजन में तब्दील हो गया।
हैरानी की बात यह है कि इस कार्यक्रम की अनुमति स्वयं एसडीएम तुलसीदास मरकाम द्वारा दी गई थी, जबकि क्षेत्र में शांति, कानून-व्यवस्था और सामाजिक मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी उन्हीं की थी।
पहले से संदिग्ध थी आयोजन की प्रकृति
निलंबन आदेश के अनुसार, कार्यक्रम से पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बार बालाओं द्वारा वीडियो और पोस्ट के माध्यम से दर्शकों को आमंत्रित किया जा रहा था, जिससे आयोजन की प्रकृति पहले से ही संदिग्ध प्रतीत हो रही थी। इसके बावजूद न तो अनुमति पर रोक लगाई गई और न ही आयोजन के दौरान प्रभावी प्रशासनिक निगरानी देखने को मिली।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
कार्यक्रम के दौरान सामने आए वीडियो में दर्शकों द्वारा खुलेआम पैसे उड़ाते हुए देखा गया। कुछ वीडियो में पुलिसकर्मी भी आपत्तिजनक हरकतें करते नजर आए, जिससे पुलिस विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
जन दबाव के बाद हुई सख्त कार्रवाई
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन पर चौतरफा दबाव बढ़ा। पहले एसडीएम को कलेक्ट्रेट अटैच किया गया, लेकिन जनता और मीडिया के दबाव के चलते रायपुर संभाग के आयुक्त महादेव कावरे ने पूरे मामले की समीक्षा कर निलंबन का आदेश जारी किया।


