महासमुंद। जिले के आदिवासी छात्रावासों की बदहाल तस्वीर, 32 बच्चों के लिए सिर्फ 13 बेड, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई और जीवन दोनों प्रभावित
महासमुंद। जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों की स्थिति बेहद चिंताजनक सामने आ रही है। बागबाहरा विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में स्थित प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास, हाथीबाहरा में बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
यह छात्रावास प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति के कार्यालय भवन में संचालित किया जा रहा है। छात्रावास में कुल 32 विद्यार्थियों की दर्ज संख्या है, जबकि सोने के लिए केवल 13 सिंगल बेड उपलब्ध हैं। हालात ऐसे हैं कि कई बेड पर दो-दो बच्चों को सोना पड़ रहा है, वहीं शेष बच्चों के लिए समुचित व्यवस्था नहीं होने से उन्हें असुविधाजनक परिस्थितियों में रात गुजारनी पड़ रही है।
संसाधनों की कमी और भीड़ के कारण बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं के अभाव से व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर हो रही हैं।
अधीक्षक पर दोहरी जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में
छात्रावास में पदस्थ अधीक्षक श्रवण कुमार यादव पर दोहरी जिम्मेदारी का भार है। वे एक ओर घोटियापानी स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं, वहीं इसी छात्रावास के संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास है। अधीक्षक को प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर दूर बागबाहरा से आना-जाना करना पड़ता है। ऐसे में विद्यालय और छात्रावास दोनों की व्यवस्थाएं किस प्रकार संभाली जा रही हैं, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
इस संबंध में अधीक्षक श्रवण कुमार यादव का कहना है कि यह स्थिति केवल हाथीबाहरा छात्रावास की नहीं है, बल्कि जिले के अधिकांश छात्रावासों में भवन और बेड की भारी कमी है। मजबूरी में बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है।
विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सरकार द्वारा आदिवासी बच्चों के आवास, सुरक्षा और शिक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर कब ध्यान देगा, या फिर आदिवासी छात्र ऐसे ही अव्यवस्थाओं के बीच पढ़ने और रहने को मजबूर रहेंगे।

