रायपुर। छत्तीसगढ़ में अग्निशमन व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। प्रदेश के 6 जिलों और 146 ब्लॉकों में आज भी एक भी फायर स्टेशन नहीं है। वहीं राज्य में मौजूद करीब 150 दमकल वाहनों में से लगभग आधे खराब बताए जा रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े अग्निकांड की स्थिति में राहत और बचाव कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
147 करोड़ की योजना पर मंडरा रहा संकट
फायर सिस्टम को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कुल 147 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। हालांकि प्रशासनिक देरी और विभागीय समन्वय की कमी के चलते यह राशि अब लैप्स होने के खतरे में है।
जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी राशि खर्च नहीं हो सकी। इसके बाद केंद्र सरकार ने विशेष अनुमति देते हुए राशि को ‘के-डिपॉजिट’ में रखने की मंजूरी दी और 30 जून 2026 तक खर्च करने की शर्त रखी।
दमकल वाहनों की खरीदी अटकी
8 अप्रैल 2026 को 124 करोड़ रुपए नगर सेना विभाग को हस्तांतरित किए गए थे। लेकिन जून के पहले सप्ताह तक भी बड़ी दमकल गाड़ियों की खरीदी के लिए मुख्य टेंडर जारी नहीं हो पाया है।
स्थिति यह है कि करीब 150 नई दमकल गाड़ियों की खरीदी पर संकट खड़ा हो गया है और समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर 124 करोड़ रुपए केंद्र सरकार को वापस लौटाने की नौबत आ सकती है।
3 साल तक फाइलों में उलझी रही योजना
केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2023-24 में देशभर में फायर सिस्टम सुधार के लिए 5,000 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। इसी योजना के तहत छत्तीसगढ़ को 110 करोड़ रुपए केंद्र से और 37 करोड़ रुपए राज्य सरकार से, कुल 147 करोड़ रुपए मिले थे।
इस राशि से नए फायर स्टेशन, दमकल वाहन और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाने थे, लेकिन तीन वर्षों में योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
43 लाख खर्च, फिर भी नहीं बनी योजना
जनवरी 2026 में परियोजना तैयार करने के लिए एक कंसल्टेंसी कंपनी को 80 लाख रुपए का ठेका दिया गया। कंपनी को 43 लाख रुपए का भुगतान भी किया गया, लेकिन उसके प्रस्ताव पर विभाग सहमत नहीं हो सका, जिससे प्रक्रिया और विलंबित हो गई।
कलेक्टरों की मांग भी नहीं मानी गई
प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलेक्टरों ने फायर सिस्टम की खराब स्थिति को देखते हुए 210 करोड़ रुपए की मांग की थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि राशि सीधे जिलों को दी जाए ताकि स्थानीय स्तर पर संसाधनों की खरीदी की जा सके, लेकिन इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली।
इन 6 जिलों में अब तक नहीं है फायर स्टेशन
राज्य सरकार विधानसभा में स्वीकार कर चुकी है कि प्रदेश के केवल 27 जिलों में ही फायर स्टेशन संचालित हैं। निम्न जिलों में अब तक फायर स्टेशन स्थापित नहीं हो सके हैं:
- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM)
- खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG)
- मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी
- सक्ती
- सारंगढ़-बिलाईगढ़
- मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)
अधिकारियों ने क्या कहा?
नगर सेना के डायरेक्टर चंद्रमोहन सिंह ने कहा कि 124 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हो चुकी है और खरीदी प्रक्रिया जारी है। बड़े वाहनों की खरीदी के लिए प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया है।
वहीं राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि फायर वाहनों का उपयोग गृह विभाग के अधीन आता है, इसलिए राशि संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। टेंडर और खरीदी की प्रक्रिया अब उसी विभाग द्वारा पूरी की जाएगी।

