CG News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में नवाचार और जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच कांकेर जिले के प्रगतिशील किसान सोनूराम ध्रुव ने सफलता की नई मिसाल पेश की है। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (एमए) की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश करने के बजाय खेती को अपना भविष्य बनाया और आज 10 एकड़ में एकीकृत जैविक खेती कर सालाना 8 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं।
कांकेर जिले के आमाबेड़ा तहसील के ग्राम चिचगांव निवासी सोनूराम ने वर्ष 2015 से जैविक खेती की शुरुआत की। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती को अपनाया। वर्तमान में वे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के अंतर्गत प्रमाणित जैविक किसान हैं और उन्हें CGOCERT से प्रमाणन भी प्राप्त है।
सोनूराम अपने खेत में जैविक चिन्नौर धान, ब्लैक राइस (काला धान), गेहूं, उड़द, कुल्थी, रागी, काली हल्दी और काली मिर्च जैसी फसलों की खेती करते हैं। इसके साथ ही आम की बागवानी, गौ-पालन और ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर रहे हैं।
वे खेत और आसपास उपलब्ध स्थानीय संसाधनों से स्वयं जीवामृत, जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करते हैं। इससे खेती की लागत में काफी कमी आई है और मिट्टी की उर्वरता भी लगातार बेहतर हो रही है। उनका शत-प्रतिशत जैविक चिन्नौर चावल बाजार में 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक की कीमत पर बिकता है।
सोनूराम का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “खर्च कम करें और लाभ बढ़ाएं” संदेश और जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाओं से उन्हें प्रेरणा मिली। आज वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के किसानों को भी प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षित और प्रेरित कर रहे हैं।
सोनूराम ध्रुव की सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। आज वे वनांचल क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा और सफल कृषि मॉडल बन चुके हैं।


