रायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ी पहल की है। उन्होंने नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को ऐसे गांवों की पहचान कर जैविक प्रमाणन (ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन) कराने के निर्देश दिए, जहां किसानों ने आज तक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे गांव छत्तीसगढ़ की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और उनकी जैविक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि हाल ही में नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त गांवों के दौरे के दौरान किसानों ने जानकारी दी थी कि वे वर्षों से बिना रासायनिक खाद के खेती कर रहे हैं। ऐसे गांवों को राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) से जोड़कर उनके उत्पादों का प्रमाणन कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जैविक प्रमाणन मिलने के बाद किसानों को अपने उत्पादों का मौजूदा कीमत की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य मिल सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और बस्तर की विशिष्ट कृषि पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
बैठक में बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसके लिए एनपीओपी और पीजीएस (Participatory Guarantee System) के तहत आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए। ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों का गठन कर किसानों को उत्पादन और विपणन से जोड़ने की योजना भी तैयार की जाएगी।
उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन के साथ दो संयुक्त दल गठित कर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का सर्वे करने के निर्देश दिए। एपीडा और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जैविक क्षेत्रों की जांच, परीक्षण और प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद बिहान के ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के माध्यम से बस्तर के उत्पादों के निर्यात की तैयारी की जाएगी।
उन्होंने बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए एनपीओपी प्रमाणन के लिए निर्धारित तीन वर्ष की अनिवार्य अवधि में छूट देने के संबंध में केंद्र सरकार को पत्र भेजने के निर्देश भी दिए। साथ ही वनोपज को निर्यात योग्य बनाने और उसके लिए आवश्यक तैयारियां तेज करने पर जोर दिया, ताकि वन उत्पादों का बेहतर मूल्य स्थानीय लोगों को मिल सके।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, सचिव भीम सिंह, सचिव धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारण प्रकाश सिन्हा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन, एपीडा, कृषि विभाग तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


