रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन करीब 14 घंटे 30 मिनट तक चली लंबी बहस के बाद कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
CM साय बोले- यह जनता के जनादेश के खिलाफ प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह प्रस्ताव सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के जनादेश के खिलाफ लाया गया है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी सत्ता में लौटेगी और इस बार 70 से अधिक सीटें हासिल करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक आदिवासी किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है, यही बात कांग्रेस को स्वीकार नहीं हो रही। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर घोटालों, वादाखिलाफी और छत्तीसगढ़ को “दिल्ली का एटीएम” बनाने का आरोप भी लगाया।
भूपेश बघेल ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा
चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों, खाद संकट, धान खरीदी, कानून-व्यवस्था, महतारी वंदन योजना, राशन वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं और आदिवासी हितों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के साथ न्याय नहीं कर रही, खाद की कमी बनी हुई है, धान खरीदी व्यवस्था कमजोर हुई है और प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
हसदेव से लेकर महादेव ऐप तक उठे मुद्दे
भूपेश बघेल ने तमनार, हसदेव अरण्य, महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप, नकली खाद और पेसा कानून जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के हितों के बजाय अन्य दबावों में फैसले ले रही है।
चरणदास महंत ने उठाया हसदेव अरण्य का मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने हसदेव अरण्य में प्रस्तावित कोयला खनन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार पर्यावरण की अनदेखी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 91 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति से करीब 15 हजार पेड़ों की कटाई होगी।
महंत ने हसदेव अरण्य को मध्य भारत का “फेफड़ा” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार उद्योगों के हित में जंगलों और पर्यावरण से समझौता कर रही है।


