रायपुर, 20 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर शुरू की गई ‘वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना’ छत्तीसगढ़ के हजारों शासकीय कर्मचारियों के लिए आर्थिक संबल बनकर उभरी है। कर्मचारी कल्याण को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह योजना सुशासन, डिजिटल पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन का प्रभावी उदाहरण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि शासकीय कर्मचारी राज्य के विकास की रीढ़ हैं। आर्थिक रूप से सशक्त कर्मचारी ही शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकते हैं। इसी सोच के साथ सरकार ने ब्याजमुक्त अल्पावधि ऋण योजना लागू की है, जिससे आकस्मिक आर्थिक जरूरतों के समय कर्मचारियों को राहत मिल सके।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि e-Kosh प्रणाली के माध्यम से पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पेपरलेस है। कर्मचारी घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ई-केवाईसी आधारित सत्यापन, सीधे बैंक खाते में राशि का भुगतान और वेतन से स्वचालित किस्त कटौती जैसी सुविधाओं ने प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बना दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने योजना में पंजीकरण कराया है, जबकि करीब 27 हजार कर्मचारियों को इसका लाभ मिल चुका है। यह आंकड़े कर्मचारियों के बढ़ते विश्वास और योजना की लोकप्रियता को दर्शाते हैं।
सरकार का कहना है कि यह योजना कर्मचारियों को निजी साहूकारों या ऊंची ब्याज दर वाले ऋण से बचाने में मदद करेगी। साथ ही इससे आर्थिक तनाव कम होगा और कर्मचारी अधिक मनोयोग से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
वित्त विभाग द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत डेटा सुरक्षा, डिजिटल प्रमाणीकरण और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री ने भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को अधिक राशि के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह पहल कर्मचारी कल्याण, डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि यह योजना न केवल कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देगी, बल्कि विकसित और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


