रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बिहान’ योजना सुकमा जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। कोंटा विकासखंड के जीरमपाल गांव की बम्लेश्वर स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने मेहनत, एकजुटता और सरकारी सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। महिलाओं ने ईंट निर्माण का कार्य शुरू कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
ईंट निर्माण से कमाए 1.32 लाख रुपये
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत गठित इस समूह की 10 महिलाओं ने पिछले एक वर्ष में 5,500 ईंटों का निर्माण और विक्रय किया। इससे समूह को 1 लाख 32 हजार रुपये की आय हुई। इस कमाई ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ उनके परिवार की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘अब किसी पर निर्भर नहीं’
समूह की सदस्य आसमती बताती हैं कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज अपनी आय से वे बच्चों की पढ़ाई, कपड़े और घर की अन्य आवश्यकताएं पूरी कर रही हैं। इतना ही नहीं, अब परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी है। आत्मनिर्भर बनने से उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है।
सरकारी सहयोग से मिली नई उड़ान
राज्य सरकार की ‘बिहान’ योजना के तहत समूह को समय पर वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई गई। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और महिलाओं की मेहनत ने इस पहल को सफल बनाया। आज बम्लेश्वर स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है।
अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
समूह की सफलता से जीरमपाल सहित आसपास के गांवों की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रही हैं। नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में यह पहल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का सफल उदाहरण बनकर सामने आई है।
मेहनत और योजना ने बदली तस्वीर
जीरमपाल की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति हो तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि पूरे गांव के विकास की नई कहानी भी लिख सकती हैं। ‘बिहान’ योजना उनके सपनों को नई उड़ान देने का सशक्त माध्यम बन रही है।


