रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अब केवल ‘धान का कटोरा’ नहीं, बल्कि ‘श्वेत क्रांति’ की नई पहचान बन रहा है। जिला प्रशासन, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और स्थानीय पशुपालकों के सामूहिक प्रयासों से डेयरी व्यवसाय एक संगठित आंदोलन का रूप ले चुका है। यह बदलाव केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक पशुपालन, सहकारिता और महिला सशक्तिकरण के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है।
20 हजार लीटर प्रतिदिन दूध संग्रहण का लक्ष्य
धमतरी जिले में वर्तमान में प्रतिदिन 10 से 15 हजार लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। इसे बढ़ाकर 20 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से जिले के 5 से 6 हजार किसान परिवार, विशेष रूप से महिला पशुपालक, सीधे लाभान्वित होंगे।
दूध का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए कीमतों को 35-40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से डिजिटल भुगतान और किसानों के बैंक खातों में सीधे राशि जमा होने से पारदर्शिता बढ़ी है और डेयरी व्यवसाय के प्रति ग्रामीणों का विश्वास मजबूत हुआ है।
68 सक्रिय दुग्ध समितियों ने बदली तस्वीर
धमतरी की डेयरी क्रांति का सबसे मजबूत आधार सहकारिता मॉडल है। पहले निष्क्रिय पड़ी दुग्ध समितियों को विशेष अभियान चलाकर दोबारा सक्रिय किया गया। आज जिले में 68 से अधिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जो वैज्ञानिक परीक्षण, संग्रहण और व्यवस्थित विपणन के जरिए किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिला रही हैं।
महिलाएं बनीं डेयरी उद्यमी
इस डेयरी मॉडल की सबसे बड़ी ताकत महिला सशक्तिकरण है। स्वयं सहायता समूहों और महिला दुग्ध समितियों से जुड़कर महिलाएं अब सिर्फ पशुपालन नहीं कर रहीं, बल्कि सफल डेयरी उद्यमी बन चुकी हैं।
NDDB के सहयोग से जिले की 43 महिला दुग्ध उत्पादकों को झारखंड के सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन कराया गया, जहां उन्होंने स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और सहकारी प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को सीखा।
अमूल मॉडल से सीखकर लौटे किसान
डेयरी क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए जिले के 19 प्रगतिशील किसानों और समिति पदाधिकारियों को गुजरात के मेहसाणा (MIT) भेजा गया। यहां उन्होंने अमूल मॉडल, उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग तकनीकों का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण से लौटे किसान और महिलाएं अब जिले में ‘मास्टर ट्रेनर’ बनकर अन्य ग्रामीणों को भी आधुनिक डेयरी प्रबंधन की जानकारी दे रहे हैं।
धमतरी में बनेगा अपना डेयरी ब्रांड
दूध उत्पादन और संग्रहण के बाद अब जिले में वैल्यू एडिशन पर तेजी से काम हो रहा है। सेमरा-बी, भाठागांव और मुजगहन में चिलिंग प्लांट पहले से संचालित हैं, जबकि कुरूद में नए प्लांट को मंजूरी मिल चुकी है।
इसके अलावा छाती क्षेत्र में आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही है। इसके शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर दूध, दही, पनीर, मक्खन और पैकेज्ड मिल्क का उत्पादन किया जाएगा। इससे परिवहन लागत घटेगी, स्थानीय डेयरी ब्रांड विकसित होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वनांचल तक पहुंचेगी डेयरी क्रांति
जिला प्रशासन की योजना के तहत इस डेयरी मॉडल का विस्तार नगरी और मगरलोड जैसे वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक किया जा रहा है। उन्नत नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, नियमित टीकाकरण, संतुलित पशु आहार और पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक पशुपालकों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सके।


