रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन में दिखाई देने वाला बदलाव बन रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ उन्हें रोजगार, तकनीक, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
इसी कड़ी में महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त जारी कर रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की महिलाओं को विशेष सौगात दी गई है। नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बनने के साथ यह भरोसा भी मजबूत कर रही है कि परिवार और समाज के विकास में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
महतारी वंदन से आर्थिक सुरक्षा का आधार
महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की पात्र महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा का नया आधार तैयार किया है। नियमित सहायता से महिलाएं अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार की आवश्यकताओं में भी योगदान दे पा रही हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर 31वीं किस्त का उपहार महिलाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और महिला सशक्तिकरण के संकल्प को दर्शाता है। आर्थिक सहायता का यह क्रम महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें आर्थिक निर्णयों में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
लखपति दीदी से बढ़ रही महिलाओं की आमदनी
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में लखपति दीदी की पहल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, छोटे व्यवसाय और अन्य आयमूलक गतिविधियों के माध्यम से अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं।
जब महिला अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और परिवार के आर्थिक निर्णयों में उसकी भागीदारी भी मजबूत होती है।
ड्रोन दीदी से आधुनिक तकनीक से जुड़ रहीं महिलाएं
छत्तीसगढ़ की महिलाएं अब आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी कदम बढ़ा रही हैं। ड्रोन दीदी जैसी पहल ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीक से जोड़ने और कृषि क्षेत्र में सेवाओं के माध्यम से आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
जो महिलाएं पहले खेतों में पारंपरिक तरीके से काम करती थीं, वे अब प्रशिक्षण लेकर ड्रोन संचालन जैसी आधुनिक गतिविधियों से जुड़ रही हैं। यह बदलाव महिला सशक्तिकरण की बदलती तस्वीर को सामने लाता है और दूसरी महिलाओं को भी नई तकनीक सीखने के लिए प्रेरित करता है।
ई-रिक्शा दीदी से रोजगार की नई राह
महिलाओं को पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़ाकर नए क्षेत्रों में अवसर देने की दिशा में ई-रिक्शा दीदी जैसी पहल भी उल्लेखनीय है। ई-रिक्शा के माध्यम से महिलाएं परिवहन क्षेत्र में रोजगार का नया अवसर प्राप्त कर अपनी आय का साधन विकसित कर सकती हैं।
यह पहल महिला को केवल रोजगार ही नहीं देती, बल्कि स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करती है।
स्व-सहायता समूह बने आर्थिक बदलाव का आधार
महिला सशक्तिकरण की इस यात्रा में स्व-सहायता समूह (Self Help Groups) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं बचत, प्रशिक्षण, ऋण, उत्पादन और बाजार से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं।
आज महिला केवल किसी योजना की लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवार की अर्थव्यवस्था, गांव की अर्थव्यवस्था और प्रदेश के विकास की सक्रिय भागीदार बनने की ओर बढ़ रही है।
चार प्रमुख पहलों से सशक्तिकरण का व्यापक स्वरूप
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की महिला-केंद्रित पहलों को एक साथ देखें तो इनका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना दिखाई देता है।
- महतारी वंदन योजना — आर्थिक संबल देती है।
- ड्रोन दीदी — आधुनिक तकनीक से जोड़ती है।
- लखपति दीदी — आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराती है।
- ई-रिक्शा दीदी — रोजगार की नई राह खोलती है।
इन पहलों से महिला सशक्तिकरण का व्यापक स्वरूप सामने आता है, जहां महिला केवल सहायता प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास की सक्रिय भागीदार बन रही है।
महतारी सदन: गांवों में महिलाओं के लिए सशक्त मंच
प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में महतारी सदन एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ऐसा स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे एकजुट होकर अपने सामाजिक, आर्थिक और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा सकें।
महतारी सदन केवल एक भवन नहीं, बल्कि संगठन, संवाद, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यहां महिलाएं स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों, प्रशिक्षण, आजीविका और विभिन्न योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकती हैं।
प्रशिक्षण और आर्थिक गतिविधियों के लिए स्थायी स्थान
महतारी सदनों में हॉल, किचन, स्टोर, कार्यालय कक्ष तथा दुकान संचालन के लिए पृथक स्थान सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनका उपयोग महिलाओं के प्रशिक्षण, बैठकों, उत्पादन, विपणन और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के संचालन के लिए किया जा सकेगा।
इससे गांव की माताओं-बहनों को अपनी बैठकों, प्रशिक्षण, स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों और आर्थिक कार्यों के संचालन के लिए स्थायी एवं सुविधाजनक स्थान मिलेगा।
राज्य सरकार के अनुसार, महिलाओं के सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 481 महतारी सदनों की स्वीकृति दी गई है।
सहायता से स्वावलंबन और स्वावलंबन से आत्मनिर्भरता
रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त से लेकर लखपति दीदी, ड्रोन दीदी, ई-रिक्शा दीदी और महतारी सदन जैसी पहलों तक महिला सशक्तिकरण की तस्वीर अब व्यापक होती दिखाई दे रही है।
इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षा से सम्मान, सहायता से स्वावलंबन और स्वावलंबन से आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाना है।
महिला मजबूत होगी, परिवार मजबूत होगा।
परिवार मजबूत होगा, तो छत्तीसगढ़ और मजबूत होगा।
यही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर है, जहां प्रदेश की माताएं और बहनें आर्थिक विकास की सक्रिय भागीदार बनकर आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रही हैं।


