बिलासपुर/दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में करीब 5 एकड़ जमीन पर कथित अवैध अफीम की खेती के मामले में पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उनकी जमानत याचिका मंजूर की।
हाईकोर्ट ने जमानत देते समय इस तथ्य पर गौर किया कि कार्रवाई के समय विनायक ताम्रकार खेत में मौजूद नहीं थे और उनके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। कोर्ट ने उन्हें कई शर्तों के साथ जमानत दी है। इनमें दुर्ग जिला नहीं छोड़ने, जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने जैसी शर्तें शामिल हैं।
जांच पूरी, 29 जुलाई को दाखिल हुई चार्जशीट
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस 29 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इसी मामले में सह-आरोपी सुखराम विश्नोई और मदरूपा राम विश्नोई को भी 31 जुलाई को जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने विनायक ताम्रकार को जमानत देने का फैसला किया।
हालांकि, विनायक ताम्रकार को दूसरी याचिका में राहत नहीं मिली। उन्होंने अफीम की खेती से जुड़े मामले में दर्ज FIR और आरोप पत्र को रद्द करने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर मामले का फैसला नहीं किया जा सकता। ऐसा करना ट्रायल शुरू होने से पहले ही मामले की पूरी सुनवाई करने जैसा होगा।
939 पन्नों का आरोप पत्र
पुलिस के अनुसार, मामले में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 2 आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस ने विनायक ताम्रकार समेत 3 लोगों को मुख्य आरोपी बनाया था।
6 मार्च को ग्राम समोदा में जेवरा-सिरसा पुलिस चौकी की टीम ने करीब 5 एकड़ जमीन पर कार्रवाई की थी। पुलिस के मुताबिक, यहां से करीब 8 करोड़ रुपये कीमत के अफीम के पौधे जब्त किए गए थे।
जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने अदालत में 939 पन्नों का आरोप पत्र पेश किया, जिसमें अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 78 गवाहों को शामिल किया गया है।
मामले में पुलिस, राजस्व, आबकारी, नारकोटिक्स और अपराध जांच से जुड़ी टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की थी। विनायक ताम्रकार को 7 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में थे।


