रायपुर/सारंगढ़-बिलाईगढ़। पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से सब्जियों की खेती अपनाकर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी 35 महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए करीब 6 लाख रुपये की आय अर्जित की है।
उजाला उत्पादक समूह से जुड़ी महिलाओं ने लौकी, करेला और खीरा की खेती वैज्ञानिक तकनीकों के साथ शुरू की। वर्ष 2025 में गठित समूह को आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर से 50 हजार रुपये की स्टार्टअप राशि और सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली से 1.50 लाख रुपये का ऋण मिला। इस तरह समूह के पास कुल 2 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी उपलब्ध हुई।
महिलाओं की मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से 250 क्विंटल लौकी, 250 क्विंटल करेला और 100 क्विंटल खीरा, यानी कुल 600 क्विंटल सब्जियों का उत्पादन हुआ।
समूह की महिलाओं ने उत्पादन के साथ-साथ बेहतर मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया। बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सब्जियों को सीधे थोक बाजार तक पहुंचाया गया, जिससे उपज का बेहतर मूल्य मिला और कुल आय करीब 6 लाख रुपये तक पहुंची।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। रिसोरा की महिलाओं की यह सफलता सामूहिक प्रयास, वैज्ञानिक खेती और बेहतर बाजार व्यवस्था के जरिए ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आई है।


