यपुर, 21 सितंबर 2026। कभी ग्राम पंडरी की महिलाओं के दिन की शुरुआत पानी की तलाश से होती थी। सुबह घर से निकलकर दूर स्थित जलस्रोत तक जाना, पानी के लिए इंतजार करना और फिर बर्तन लेकर वापस लौटना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। पानी लाने में लगने वाला समय महिलाओं के घरेलू कामों के साथ बच्चों की पढ़ाई और परिवार की दूसरी जरूरतों को भी प्रभावित करता था।
अब गांव की तस्वीर बदल रही है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत घर-घर नल कनेक्शन पहुंचने से ग्रामीण परिवारों को घर पर ही पेयजल की सुविधा मिल रही है। इससे पानी के लिए दूर जाने की मजबूरी कम हुई है और महिलाओं के समय व श्रम की बचत हो रही है।
घर के आंगन में पहुंचा पानी
आदिवासी बाहुल्य गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड का ग्राम पंडरी इस बदलाव का उदाहरण है। गांव की श्रीमती शीला केवट सहित कई महिलाओं के लिए घर में नल से पानी मिलना रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ी सुविधा लेकर आया है।
शीला केवट बताती हैं कि पहले पानी भरने के लिए घर के जरूरी काम छोड़कर दूर जाना पड़ता था। कई बार पानी लाने में सुबह का काफी समय निकल जाता था। अब घर में ही नल से पानी मिलने से काफी सुविधा हुई है। बचा हुआ समय बच्चों, परिवार और दूसरे जरूरी कामों में लगाया जा सकता है।
महिलाओं के समय और श्रम की बचत
जल जीवन मिशन का एक महत्वपूर्ण प्रभाव महिलाओं और बालिकाओं के जीवन में देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी लाने की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं पर रहती है। घर तक नल से पानी पहुंचने से उन्हें पानी ढोने की कठिन मेहनत और इसमें लगने वाले समय से राहत मिलती है।
बचा हुआ समय परिवार की देखभाल, बच्चों की शिक्षा, आजीविका और अन्य गतिविधियों में उपयोग किया जा सकता है। ग्राम पंडरी में भी ग्रामीण महिलाओं की दिनचर्या में यह बदलाव दिखाई दे रहा है।
‘हर घर जल’ के विजन से जुड़ा बदलाव
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा करते हुए ग्रामीण परिवारों तक घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाने का संकल्प रखा था। उस समय देश के 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में लगभग 3.23 करोड़, यानी करीब 17 प्रतिशत परिवारों के पास ही नल से जल की सुविधा थी।
जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन और नल कनेक्शन उपलब्ध कराना नहीं है। इसके तहत नियमित एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति के साथ जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्भरण और ग्रे-वॉटर प्रबंधन जैसे उपायों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मिशन में जनभागीदारी पर भी जोर दिया गया है।
सुविधा के साथ जीवन की गुणवत्ता में बदलाव
ग्राम पंडरी में घर तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों की दिनचर्या आसान हुई है। महिलाओं को पानी ढोने से राहत मिलने के साथ बच्चों को पढ़ाई और खेल के लिए अधिक समय मिल रहा है। परिवारों को भी दूसरे जरूरी कार्यों के लिए समय मिल रहा है।
स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बच्चों, बुजुर्गों और परिवार के अन्य सदस्यों को भी घर पर पानी की सुविधा का लाभ मिल रहा है।
जल जीवन मिशन 2.0 पर जोर
जल जीवन मिशन की सात वर्षों की यात्रा में देश के अनेक गांवों की तरह ग्राम पंडरी में भी ‘नल से जल’ ग्रामीण जीवन में बदलाव का माध्यम बना है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 में जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण जलापूर्ति सेवाओं की विश्वसनीयता, गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पंडरी में दिख रही बदलाव की तस्वीर
ग्राम पंडरी में घर के आंगन में लगा नल अब केवल पानी का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए बुनियादी सुविधा का प्रतीक बन रहा है। जिस पानी के लिए महिलाओं को पहले दूर तक जाना पड़ता था, वही पानी अब घर की चौखट तक पहुंच रहा है।
शीला केवट और गांव की अन्य महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि नल से जल मिलने से समय और श्रम की बचत हुई है। यह बदलाव परिवारों की दिनचर्या को आसान बनाने के साथ ग्रामीण जीवन में सुविधा और बेहतर अवसरों की राह भी खोल रहा है।


