रायपुर। किसी भी राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला उसके स्वस्थ और सक्षम नागरिक होते हैं। स्वस्थ मां से स्वस्थ परिवार और सुपोषित बच्चे से सक्षम पीढ़ी की नींव तैयार होती है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता पहुंचाई जा रही है।
मातृत्व के संवेदनशील समय में आर्थिक सहयोग से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण और प्रारंभिक शिक्षा तथा स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आजीविका तक, इन प्रयासों का उद्देश्य पोषण को परिवार और समाज के व्यापक विकास से जोड़ना है।
पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं
पोषण का अर्थ केवल पर्याप्त भोजन उपलब्ध होना नहीं है। गर्भावस्था से लेकर शिशु अवस्था, बाल्यावस्था और किशोरावस्था तक संतुलित पोषण स्वास्थ्य और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसी उद्देश्य से आंगनबाड़ी सेवाओं, पोषण गतिविधियों, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), बिहान और महतारी वंदन योजना जैसी पहलों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों तक पोषण, जागरूकता तथा आर्थिक सहयोग पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को आर्थिक सहायता देने के साथ बेहतर पोषण और सकारात्मक स्वास्थ्य व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित की जाती है।
मातृत्व के संवेदनशील समय में पोषण का संबल
अंबिकापुर की अन्नू तिवारी का अनुभव बताता है कि मातृत्व के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता किस तरह पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकती है।
पहली बार गर्भवती होने पर उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी मिली। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें चरणबद्ध रूप से योजना की राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उन्होंने खान-पान और पोषण संबंधी जरूरतों के लिए किया।
गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिला के लिए उचित पोषण का विशेष महत्व होता है। ऐसे समय में मिलने वाला आर्थिक सहयोग परिवार को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों पर अधिक ध्यान देने का अवसर देता है।
स्वस्थ महिला से मजबूत होता है पूरा परिवार
महिला का पोषण केवल उसके व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसका संबंध परिवार की देखभाल, बच्चों के पोषण और दैनिक जीवन की जिम्मेदारियों से भी है।
पर्याप्त पोषण महिला के स्वास्थ्य और सक्रियता को सहारा देता है। वहीं स्वास्थ्य के साथ आर्थिक अवसर मिलने पर महिलाओं की आजीविका और परिवार के निर्णयों में भागीदारी भी बढ़ सकती है। इस तरह पोषण और महिला सशक्तिकरण एक-दूसरे के पूरक बनकर परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भूमिका निभाते हैं।
लक्ष्मी ने पोषण को बनाया सेवा और आजीविका का माध्यम
ग्राम खैरबार की लक्ष्मी यादव की कहानी पोषण और महिला सशक्तिकरण के संबंध को सामने लाती है। बिहान के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ‘पोषण सखी’ के रूप में कार्य करने का अवसर मिला।
अब वे आर्थिक गतिविधि से जुड़ने के साथ गांव की गर्भवती एवं शिशुवती माताओं और बच्चों को पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रही हैं। घर-घर जाकर संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने वाली लक्ष्मी की भूमिका बताती है कि आजीविका और अवसर मिलने पर महिलाएं अपने परिवार के साथ समुदाय में भी सकारात्मक बदलाव की सहभागी बन सकती हैं।
उन्हें मिलने वाली आय के साथ महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता भी परिवार के लिए अतिरिक्त संबल के रूप में सामने आती है।
आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण के साथ सीखने का बेहतर वातावरण
बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास में आंगनबाड़ी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उदयपुर विकासखंड का सलकापारा आंगनबाड़ी केंद्र इसका उदाहरण है।
पहले किराए के जर्जर भवन और सीमित स्थान में संचालित यह केंद्र अब नवनिर्मित भवन में संचालित हो रहा है। आईसीडीएस और विकसित भारत जी राम जी योजना के अभिसरण से निर्मित भवन में बड़ा हॉल, रसोई, स्टोर, शौचालय, बाथरूम और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यहां बच्चों को प्री-स्कूल शिक्षा और पोषण संबंधी सेवाओं का लाभ मिल रहा है। गर्भवती माताएं और किशोरी बालिकाएं भी स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी सेवाओं से जुड़ रही हैं।
यह बदलाव बताता है कि बच्चों के समग्र विकास के लिए पोषण के साथ सुरक्षित भवन, स्वच्छता, पेयजल, प्रारंभिक शिक्षा और जागरूकता का वातावरण भी महत्वपूर्ण है।
आज का सुपोषित बच्चा, कल का सक्षम नागरिक
जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण बच्चे के शारीरिक विकास और सीखने की क्षमता को सहारा देता है। स्वस्थ बच्चा शिक्षा, खेल और अन्य गतिविधियों में बेहतर ढंग से भाग ले सकता है।
इसीलिए बच्चों के शुरुआती वर्षों में स्वास्थ्य और पोषण पर किया गया निवेश आने वाली पीढ़ी के विकास से जुड़ा है। आज स्वस्थ वातावरण में बढ़ने वाला बच्चा आगे चलकर अपनी शिक्षा और क्षमताओं के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे सकता है।
पोषण से परिवार और परिवार से मजबूत होता है समाज
पोषण का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। स्वस्थ मां बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकती है और स्वस्थ एवं सुपोषित बच्चा शिक्षा तथा विकास के अवसरों का बेहतर उपयोग कर सकता है।
आगे चलकर यही स्वस्थ और शिक्षित पीढ़ी रोजगार, उद्यम, कृषि और अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में योगदान दे सकती है। इस दृष्टि से स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण का आपसी जुड़ाव परिवारों को सक्षम बनाने के साथ समाज के दीर्घकालिक विकास में भी भूमिका निभाता है।
पोषण से सशक्तिकरण तक, भविष्य की मजबूत नींव
महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं का महत्व तत्काल सहायता से आगे बढ़कर स्वस्थ और सक्षम पीढ़ी तैयार करने से जुड़ा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना मातृत्व के दौरान आर्थिक सहयोग देती है, आंगनबाड़ी सेवाएं पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा का आधार बनती हैं, बिहान महिलाओं को समूह और आजीविका से जोड़ता है, जबकि महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता महिलाओं को अतिरिक्त संबल प्रदान करती है।
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 में भी मातृ पोषण, आंगनबाड़ी सेवाओं, प्रारंभिक बाल विकास और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
आज गर्भवती महिला के पोषण और स्वास्थ्य पर दिया गया ध्यान कल स्वस्थ बच्चे की नींव बन सकता है। वहीं बच्चे को मिला पोषण और प्रारंभिक सीखने का बेहतर वातावरण उसके भविष्य के विकास में सहायक हो सकता है। सुपोषित महिला, स्वस्थ बच्चा और सक्षम युवा की यही श्रृंखला विकसित छत्तीसगढ़ के लिए मजबूत मानवीय पूंजी तैयार करने का आधार बन सकती है।


