ग्वालियर। पत्नी के साथ अननैचुरल सेक्स और मारपीट करने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के ग्वालियर बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पत्नी की बगैर रजामंदी के अननैचुरल सेक्स किए जाने को क्रूरता बताया है। मामले में पत्नी ने पति के खिलाफ केस दर्ज कराया था, जिसे खारिज करने के लिए पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब मामले में सुनवाई करते हुए पत्नी की याचिका को सही ठहराया है। साथ ही ये भी कहा है कि पति पर आईपीसी की धारा 377 या 376 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
मिली जानकारी के अनुसार मामला ग्वालियर का है, जहां रहे वाले एक युवक की शादी इलाके की ही युवती से साल 2023 में हुआ था। शादी के बाद दोनों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन बाद में पति शराब पीकर आने लगा। इतना ही नहीं आरोपी पति नशे में धुत होकर अननेचुरल सेक्स करने की डिमांड करता था। वहीं, जब पत्नी डिमांड पूरी करने से मना करती तो उसके साथ मरपीट करता था। पति की हरकतों से परेशान को पत्नी ने मामला दर्ज कराया।
पत्नी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 377, 323 और 498 (ए) के तहत केस दर्ज कराया, जिसके बाद आरोपी पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पति का कहना था कि पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंध भारतीय कानून में अपराध नहीं है। उसने यह भी कहा कि एफआईआर में दहेज उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं है, इसलिए 498 (ए) भी लागू नहीं होता।
जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने इस मामले पर फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि पत्नी की इच्छा के विरुद्ध और उसके विरोध करने पर उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाना, मारपीट करना और शारीरिक क्रूरता करना निश्चित रूप से क्रूरता की परिभाषा में आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्रूरता के लिए दहेज की मांग जरूरी नहीं है।


