ढाका। बांग्लादेश में साल 2024 में हुए छात्र-आंदोलन के मामले को लेकर बड़ा अपडेट आया है। मामले को लेकर अभियोजन पक्ष आरोप पत्र दाखिल किए हैं, जिसमें शेख हसीना पर आंदोलन को कुचलने के लिए नरसंहार करवाने सहित कई गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने कहा कि ये हत्याएं योजनाबद्ध थीं। इसे नरसंहार भी कहा गया है।
ताजुल इस्लाम ने अपने आरोप पत्र में कहा है कि देश के सुरक्षा बलों और ऐजेंसियों को सरकार की हैंडल करती है और ऐसे में नरसंहार होना सीधे दर्शाता है कि सरकार के इशारे में ये काम किया गया है। इस मामले में 81 लोगों को गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अभियोजकों ने यह भी कहा कि शेख हसीना पर एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में देश की सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई की पूर्ण जिम्मेदारी होती है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ढाका, चिटगांव और अन्य शहरों में सुरक्षा बलों ने छात्रों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं और कई जगहों पर विरोध स्थलों को जबरन हटाया गया।
बता दें कि साल 2024 में आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर छात्रों ने मोर्चा खोल दिया था, जिसके बाद यहां भी भारी अफरातफरी का माहौल बना था। इस आंदोलन में कई लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें छात्र और सुरक्षा बल के जवान शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच लगभग 1,400 लोग मारे गए, जिनमें छात्र और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। वहीं, हिंसक आंदोलन के कुछ ही दिन बाद शेख हसीना को सत्ता गंवानी पड़ी थी और देश छोड़कर भागना पड़ गया था।
गौरतलब है कि 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तानी सेना के सहयोगियों पर मुकदमा चलाने के लिए गठित न्यायाधिकरण ने पहले कई जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेताओं को मौत की सजा सुनाई है। ऐसे में इस बात की संभावना है कि शेख हसीना को भी मौत की सजा सुनाई जा सकती है।


