जयपुर। कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने के समय राजस्थान सरकार द्वारा संचालित मिड डे मील योजना में करीब 2000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। इस गंभीर प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
योजना के तहत स्कूल बंद होने की स्थिति में विद्यार्थियों को सूखा राशन पैक कर उनके घर तक पहुंचाने का प्रावधान किया गया था। सरकार की ओर से दावा किया गया था कि यह सामग्री सभी पात्र छात्रों तक पहुंचाई गई, लेकिन जांच में सामने आए आंकड़े इन दावों से मेल नहीं खाते। शुरुआती जांच में योजना के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
ACB की जांच में सामने आया है कि मिड डे मील योजना से जुड़े अधिकारी और अन्य संबंधित लोग आपसी मिलीभगत में शामिल थे। आरोप है कि नियमों में मनमाने तरीके से बदलाव किए गए, जिससे वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक राशन सामग्री नहीं पहुंच सकी। टेंडर प्रक्रिया में योग्य फर्मों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया और चहेती कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ मामलों में योजना का कार्य अवैध रूप से अन्य संस्थाओं को सौंप दिया गया, जिससे संगठित भ्रष्टाचार का नेटवर्क तैयार हो गया। कई जगह न तो सामग्री की वास्तविक खरीद हुई और न ही वितरण किया गया, इसके बावजूद फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिल लगाए गए, जिनके आधार पर सरकारी खजाने से भुगतान कर दिया गया।
ACB के अनुसार, इस पूरे घोटाले से सरकारी खजाने को करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन-किन अधिकारियों और ठेकेदारों की क्या भूमिका रही, पैसों का लेनदेन कहां और कैसे हुआ तथा सरकारी धन का दुरुपयोग किस स्तर तक किया गया।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे हैं। रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

