इंदौर। इंदौर में भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान प्रशासन को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सर्राफा क्षेत्र से बचाए गए 50 वर्षीय कुष्ठ रोगी भिखारी के पास तीन पक्के मकान, एक कार और तीन ऑटो रिक्शा समेत लाखों रुपये की संपत्ति होने की शुरुआती जानकारी मिली है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि आम लोगों की सूचना पर इस व्यक्ति को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया। जांच में सामने आया कि उसके पास तीन मकान हैं, जिनमें एक तीन मंजिला इमारत भी शामिल है। इसके अलावा तीन ऑटो रिक्शा हैं, जिन्हें किराये पर दे रखा गया है।
कार में बैठकर मांगता था भीख
अधिकारियों के अनुसार, यह व्यक्ति कार में बैठकर भीख मांगने जाता था और इसके लिए उसने चालक भी रखा हुआ था। कुष्ठ रोग के कारण वह पहियों वाली घिसटने की गाड़ी पर बैठकर भीख मांगता था।
ब्याज से होती थी रोजाना कमाई
दिनेश मिश्रा ने बताया कि यह व्यक्ति वर्ष 2021-22 से भिक्षावृत्ति कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने सर्राफा क्षेत्र के लोगों को चार से पांच लाख रुपये ब्याज पर दे रखे थे, जिससे उसे प्रतिदिन 1,000 से 2,000 रुपये की आमदनी होती थी। इसके अलावा उसे रोजाना 400 से 500 रुपये भीख से भी मिल जाते थे।
आश्रय गृह में रखा गया
फिलहाल, इस व्यक्ति को एक आश्रय गृह में रखा गया है। जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने कहा कि इंदौर को ‘भिक्षुकमुक्त शहर’ घोषित किया गया है और भिक्षावृत्ति की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि इस मामले में संपत्तियों की विस्तृत जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील
भिक्षावृत्ति उन्मूलन के क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ ‘प्रवेश’ की अध्यक्ष रूपाली जैन ने कहा कि इस मामले को मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह व्यक्ति पहले मिस्त्री का काम करता था, लेकिन कुष्ठ रोग के कारण काम छोड़ना पड़ा। सामाजिक और पारिवारिक भेदभाव के चलते उसने मजबूरी में भीख मांगना शुरू किया।


