रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की गाइडलाइन कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में कोरबा और रायपुर जिलों में गाइडलाइन दरों में कटौती के आदेश जारी किए जाने के बाद पूरे प्रदेश में गाइडलाइन रेट कम किए जाने की मांग तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी बजट सत्र में सरकार इस संबंध में कोई बड़ा फैसला ले सकती है।
जानकारी के अनुसार, खासकर ग्रामीण इलाकों की जमीनों की गाइडलाइन कीमतें वास्तविक बाजार मूल्य से काफी अधिक होने को लेकर लंबे समय से आपत्तियां सामने आ रही थीं। किसानों और आम नागरिकों का कहना था कि अधिक गाइडलाइन दरों के कारण रजिस्ट्री कराने और जमीन के लेन-देन में भारी परेशानी हो रही है।
इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पहले चरण में रायपुर और कोरबा जिलों में गाइडलाइन रेट घटाने का निर्णय लिया है। इसके बाद अन्य जिलों में भी दरों में कटौती की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन ने वर्ष 2025-26 के लिए नई गाइडलाइन दरें पूरे प्रदेश में लागू की थीं। “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” के तहत केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड, रायपुर द्वारा अनुमोदित ये दरें 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हुई थीं। यह संशोधन वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार राज्यव्यापी स्तर पर किया गया था।
दरअसल, करीब आठ वर्षों तक गाइडलाइन दरों में संशोधन नहीं होने के कारण बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया था। इस अंतर को कम करने के लिए शासन ने वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर दरों का रेशनलाइजेशन किया था। इसमें जिलों की भौगोलिक स्थिति, शहरी और ग्रामीण संरचना, सड़क संपर्क, बसाहट और आर्थिक गतिविधियों में आए बदलावों को आधार बनाया गया था।
अब रायपुर और कोरबा में दरों में कटौती के बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकार प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी गाइडलाइन कीमतों पर पुनर्विचार कर सकती है।

