नई दिल्ली: देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया को लेकर जहां एक ओर सराहना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसके विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं। इस प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। आज का दिन इस मामले में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलें पेश करेंगी।
दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में आज एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी बात रखेंगी। यह पहला अवसर माना जा रहा है जब कोई मौजूदा मुख्यमंत्री किसी संवैधानिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट में बहस करती नजर आएंगी। मामला स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसे लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा SIR के तहत जारी आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के लागू होने से मौजूदा मतदाता सूची पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और लाखों मतदाताओं के नाम हटाए या बदले जाने की आशंका है। मुख्यमंत्री ने अदालत से आग्रह किया है कि वर्ष 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पहले से मान्य और वैध मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाएं।
मुख्यमंत्री का तर्क है कि चुनाव से ठीक पहले SIR लागू करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि इससे निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की भावना को नुकसान पहुंच सकता है। ममता बनर्जी ने यह भी कहा है कि मतदाता सूची में किसी भी बड़े स्तर पर संशोधन से पहले राज्यों से व्यापक परामर्श और राजनीतिक सहमति आवश्यक है।
याचिका में चुनाव आयोग के आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है। इसके साथ ही यह आग्रह भी किया गया है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह का बड़ा बदलाव करने से पहले संबंधित राज्यों को विश्वास में लिया जाए। याचिका में यह आशंका भी जताई गई है कि SIR के चलते कुछ वर्गों और समुदायों के मताधिकार प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

