नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिका की ओर से हाल में ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अन्य क्षेत्रों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य अभियान के जवाब में की गई है।
खाड़ी देशों में हाई अलर्ट
हमलों के बाद कतर की राजधानी दोहा में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कतर प्रशासन ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर सुरक्षा अलर्ट जारी कर लोगों से घरों या सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की। बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए, जबकि यूएई ने बताया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में सक्रिय रही।
अमेरिका ने क्यों किया था हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिका के अनुसार इन हमलों में ड्रोन लॉन्च साइट, हथियार भंडार, संचार केंद्र और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों और समुद्री सुरक्षा को लेकर की गई थी।
IRGC का दावा
IRGC ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है और चेतावनी दी है कि यदि ईरान के खिलाफ आगे भी सैन्य कार्रवाई हुई तो उसका और कड़ा जवाब दिया जाएगा। हालांकि, इन दावों के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में उपलब्ध नहीं है।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा
लगातार सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने नागरिकों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


