रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘मोर गाँव मोर पानी’ महाअभियान प्रदेश में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण विकास का प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। वीबी जी राम जी योजना के तहत चलाए जा रहे इस अभियान ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सेमरदर्री गांव में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जहां वैज्ञानिक तकनीक से प्रतिदिन करीब 67 लाख 23 हजार लीटर वर्षा जल भू-जल में समाहित हो रहा है।
8300 कंटूर ट्रेंच से बढ़ा भू-जल स्तर
मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत सेमरदर्री के भाटा-टिकरा, शीतल गडहा और पथरा कोड़ी क्षेत्र में 8300 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (SCT) बनाए गए हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का बहाव नियंत्रित होकर भूमि में समाहित हो रहा है, जिससे भू-जल स्तर में सुधार, मिट्टी की नमी का संरक्षण और कृषि व वन क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिल रहा है।
जल संरक्षण के साथ रोजगार भी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच के अनुरूप यह अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है। ट्रेंच निर्माण कार्यों में प्रतिदिन 100 से 120 श्रमिकों को रोजगार मिला है और अब तक 8078 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार हुए हैं।
जनभागीदारी से बन रहा जल संरक्षण का मॉडल
जिला प्रशासन ने जनभागीदारी को केंद्र में रखकर जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्थायी जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे भविष्य में जल उपलब्धता बढ़ेगी, खेती अधिक टिकाऊ बनेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय की दूरदर्शी पहल
‘मोर गाँव मोर पानी‘ महाअभियान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। यह अभियान जल सुरक्षा, भू-जल संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में इस मॉडल को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की तैयारी है।


