रायपुर, 2 अगस्त 2026। निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े चर्चित मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है। पुलिस विभाग में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर अपनी शिकायत की जांच किसी IPS अधिकारी के बजाय वरिष्ठ IAS अधिकारी, विशेष रूप से महिला IAS अधिकारी, से कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने डांगी की कथित अवैध संपत्ति की जांच और आरोप सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्त करने की भी मांग की है।
महिला की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।
वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक हरकतों का आरोप
याचिका में महिला ने बताया कि वह योग प्रशिक्षक हैं और इसी दौरान उनकी पहचान तत्कालीन आईजी रतनलाल डांगी से हुई थी। उनका आरोप है कि शुरुआत में सामान्य बातचीत के बाद डांगी ने कथित तौर पर वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक हरकतें शुरू कर दीं। विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने तथा पुलिस विभाग में कार्यरत उनके पति के खिलाफ कार्रवाई कराने की धमकी दी गई।
डिजिटल साक्ष्य होने का दावा
महिला का दावा है कि उनके पास व्हाट्सएप चैट और वीडियो कॉल से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि इन साक्ष्यों के साथ 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखित शिकायत भी दी थी।
जांच की निष्पक्षता पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि शिकायत की जांच तत्कालीन आईजी आनंद छाबड़ा और तत्कालीन डीआईजी मिलना कुर्रे को सौंपी गई थी। हालांकि महिला ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक अधिकारी आरोपी के समान रैंक के थे, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे जूनियर थीं। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से वरिष्ठ महिला IAS अधिकारी से जांच कराने का अनुरोध किया है।
अवैध संपत्ति की जांच और बर्खास्तगी की मांग
रिट याचिका में रतनलाल डांगी की कथित अवैध संपत्ति की जांच कराने तथा आरोप सिद्ध होने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की भी मांग की गई है। महिला का कहना है कि इतनी गंभीर शिकायत के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और मामला सार्वजनिक होने के बाद ही डांगी को निलंबित किया गया।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने मामले में कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। याचिका में लगाए गए आरोप न्यायिक विचाराधीन हैं। मामले की जांच किस एजेंसी से होगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी, इसका निर्णय अदालत के आगामी आदेश के बाद ही होगा।


