महासमुंद। बहते पानी के वक्त अब महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत टेका के आश्रित गांव सेवैयाकला की गलियों में पानी का बर्तन लिए महिलाओं की कतारें दिखाई नहीं देतीं। घरों के आंगन में लगे नल खुलते हैं और साफ पानी की धार बहने लगती है। बच्चों के हाथों में अब पानी से भरी बाल्टियां नहीं, बल्कि स्कूल का बस्ता है। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि जल जीवन मिशन के तहत किए गए प्रयासों का परिणाम है, जिसने गांव में पानी को सुविधा के साथ सम्मान और राहत से जोड़ दिया है।
सेवैयाकला ने इस साल जून में ‘हर घर जल’ का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब गांव के सभी 185 घरों तक नियमित रूप से नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। ग्रामीणों के लिए यह केवल एक सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आया ऐसा बदलाव है, जिसे वे हर दिन महसूस कर रहे हैं।
गांव की देविका साहू बताती हैं कि पहले पानी लाना ही सबसे बड़ा काम था। गर्मी के दिनों में कई बार आधा दिन पानी जुटाने में निकल जाता था। अब नल खोलते ही पानी मिल जाता है, जिससे समय बचने के साथ चिंता भी खत्म हो गई है। गांव की महिलाओं का कहना है कि नल से पानी पहुंचने के बाद उनकी दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है।
पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह महिलाओं के श्रम, बच्चों के समय और पूरे परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। सेवैयाकला में नल से जल पहुंचने के बाद सुबह के जिन घंटों में पहले पानी की व्यवस्था करने में समय बीतता था, अब वही समय बच्चों की पढ़ाई, खेती-किसानी और घरेलू कामों में लगाया जा रहा है।
इस बदलाव के पीछे जल जीवन मिशन के तहत 81 लाख 52 हजार रुपए की लागत से तैयार की गई जलापूर्ति व्यवस्था है। गांव में 40 किलोलीटर क्षमता की ऊंची पानी टंकी बनाई गई है। इसके अलावा 3,825 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया है। प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र को भी इसी जलापूर्ति व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे बच्चों को भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
सरपंच श्रीमती कमली बसंत और सचिव श्रीमती हेमलता साहू के नेतृत्व में योजना को समय पर पूरा किया गया। गांव में जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति भी बनाई गई है। व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रत्येक परिवार 60 रुपए प्रतिमाह दे रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में भी निर्बाध रूप से पानी की आपूर्ति जारी रह सके। गांव के मिथिलेश बसंत प्रतिदिन निर्धारित समय पर पंप का संचालन कर पूरे गांव तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
सेवैयाकला की कहानी बताती है कि विकास केवल आंकड़ों में नहीं दिखता, बल्कि लोगों की बदली हुई दिनचर्या में दिखाई देता है। जब महिलाओं को पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता, बच्चे पानी ढोने के बजाय समय पर स्कूल पहुंचते हैं और हर घर में स्वच्छ पानी उपलब्ध होता है, तभी किसी योजना की वास्तविक सफलता दिखाई देती है।
आज सेवैयाकला में बहता पानी केवल नलों से नहीं आ रहा, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में सुविधा, स्वास्थ्य और सम्मान का नया भरोसा भी लेकर आया है। जल जीवन मिशन की यह उपलब्धि गांव के लिए केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलती ग्रामीण जिंदगी की जीवंत मिसाल बन गई है।


