रायपुर, अगस्त 2026। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में स्व-सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ‘विष्णु के सुशासन’ में महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के अवसर देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर गांवों में दिखाई दे रहा है।
मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सुमन लता वाकरे इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की और मेहनत व लगन के बल पर आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना ली है।
स्व-सहायता समूह से जुड़कर खुली आत्मनिर्भरता की राह
सुमन लता मां महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और समूह में सचिव की जिम्मेदारी निभा रही हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला।
15 हजार रुपये की आरएफ राशि बनी शुरुआत का आधार
सुमन लता को स्व-सहायता समूह के माध्यम से 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद समूह को मिली 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से उन्होंने 20 हजार रुपये का उपयोग किराना दुकान शुरू करने के लिए किया।
छोटे स्तर से शुरू हुआ व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ा। सुमन लता ने पूरी मेहनत और लगन से दुकान का संचालन किया। व्यवसाय बढ़ने के बाद उन्होंने बैंक से ऋण लेकर दुकान का विस्तार किया।
आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी बड़ी हो चुकी है और इसी व्यवसाय से उन्हें हर वर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है।
मेहनत और अवसर ने बदली आर्थिक तस्वीर
सुमन लता की सफलता बताती है कि आर्थिक सहयोग के साथ महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास मिले तो वे अपनी परिस्थितियों को बदल सकती हैं।
कभी आर्थिक परेशानियों का सामना करने वाली सुमन लता आज अपने परिवार के लिए आर्थिक सहारा बनने के साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया प्रयास भी निरंतर मेहनत और सही मार्गदर्शन से बड़ी सफलता में बदल सकता है।
समूह ने दिया आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास
सुमन लता के अनुसार स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। समूह ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास दिया।
किराना दुकान के विस्तार से उनकी आय में वृद्धि हुई और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। आज वह स्वयं अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं और अपनी मेहनत से आगे बढ़ रही हैं।
महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों का भी मिला लाभ
सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने पर उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाला सहयोग उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे रहा है। उनके लिए ‘विष्णु भैया’ की सरकार की योजनाएं आर्थिक संबल के साथ भविष्य को बेहतर बनाने का भरोसा भी देती हैं।
‘लखपति दीदी’ बनकर बनीं गांव की प्रेरणा
सुमन लता वाकरे की सफलता सिर्फ किराना दुकान के विस्तार की कहानी नहीं, बल्कि एक ग्रामीण महिला के आत्मनिर्भर बनने की कहानी है। स्व-सहायता समूह से मिली आर्थिक मदद, बैंक ऋण का उपयोग, व्यवसाय के प्रति समर्पण और निरंतर मेहनत ने उन्हें ‘लखपति दीदी’ की पहचान दिलाई।
‘विष्णु के सुशासन’ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली योजनाओं का लाभ लेकर सुमन लता ने साबित किया है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं रहतीं, बल्कि परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकती हैं।
आज सुमन लता की किराना दुकान उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुकी है। उनकी सफलता गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे प्रयास से अपना रोजगार शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत बनना चाहती हैं।


