रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के प्रोत्साहन और विभागीय मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं तेजी से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। जशपुर जिले के मनोरा और दुलदुला विकासखंड की स्व-सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं ने सरकारी तालाबों में मछली पालन को अपनी आय का प्रमुख साधन बना लिया है।
सरकारी तालाबों के दीर्घकालिक पट्टे और तकनीकी सहयोग मिलने से महिलाओं को व्यवसाय के लिए स्थायी आधार मिला है। मेहनत और सही प्रबंधन के जरिए समूहों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
कमल महिला समूह की सालाना बिक्री करीब 6 लाख रुपये
मनोरा विकासखंड के ग्राम भभरी की कमल महिला स्व-सहायता समूह को 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाला सरकारी तालाब 10 वर्षीय पट्टे पर मिला है।
समूह द्वारा तालाब में मछली पालन से हर वर्ष करीब 3 क्विंटल उत्पादन किया जा रहा है। इससे लगभग 6 लाख रुपये की वार्षिक बिक्री होने का अनुमान है।
मछली पालन से होने वाली आय ने समूह से जुड़ी महिलाओं की घरेलू आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों पर भी बेहतर खर्च करने में मदद मिल रही है।
दीप महिला समूह ने बनाया 6.93 लाख रुपये की बिक्री का रिकॉर्ड
दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की दीप महिला स्व-सहायता समूह भी मछली पालन के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही है।
समूह के पास 0.800 हेक्टेयर क्षेत्रफल का तालाब है। यहां से हर वर्ष करीब 3.30 क्विंटल मछली उत्पादन किया जा रहा है। इससे लगभग 6.93 लाख रुपये की वार्षिक बिक्री होने का अनुमान है।
समूह से जुड़ी महिलाओं की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत होकर परिवार की जरूरतों में अधिक योगदान दे पा रही हैं।
पट्टा और प्रशिक्षण ने खोली आत्मनिर्भरता की राह
ग्रामीण महिलाओं के लिए सरकारी तालाबों का पट्टा और मछली पालन से जुड़ा तकनीकी प्रशिक्षण महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाओं ने उपलब्ध अवसर का बेहतर उपयोग करते हुए मछली पालन को आय के स्थायी साधन में बदल दिया है।
अब ये महिलाएं केवल परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग ही नहीं कर रही हैं, बल्कि घरेलू वित्तीय निर्णयों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। साथ ही, इनके व्यवसाय से गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
कमल और दीप महिला स्व-सहायता समूह की सफलता यह दिखाती है कि उचित मार्गदर्शन, तकनीकी प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता से ग्रामीण महिलाएं छोटे स्तर के काम को भी लाभकारी व्यवसाय में बदल सकती हैं।
मछली पालन से जुड़ी इन महिलाओं की सफलता अब गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता दिखा रही है।


