वाराणसी l जिला अदालत ने गुरुवार रात दस बजे काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट पक्षकारों को सौंप दी। रिपोर्ट के मुताबिक ज्ञानवापी में मस्जिद की वर्तमान संरचना के निर्माण से पहले बड़ा हिन्दू मंदिर था। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद हिन्दू पक्ष ने कहा कि अब हिन्दुओं को वहां पूजा-पाठ की अनुमति मिलनी चाहिए, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है।
- काशी में ज्ञानवापी परिसर का एएसआई सर्वे पक्षकारों को सौंप दी गई है
- रिपोर्ट मिलने के बाद हिन्दू पक्ष ने वहां पूजा-पाठ की अनुमति मांगी है
- मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे कानूनी लड़ाई को और आगे ले जाएंगे
सर्वे की रिपोर्ट
1. मस्जिद से पहले वहां बने मंदिर में बड़ा केंद्रीय कक्ष और उत्तर की ओर छोटा कक्ष था।
2. 17वीं शताब्दी में मंदिर को तोड़कर उसके हिस्से को मस्जिद में समाहित किया गया।
3. मस्जिद के निर्माण में मंदिर के खंभों के साथ ही अन्य हिस्सों का बिना ज्यादा बदलाव किए इस्तेमाल किया गया।
4. कुछ खंभों से हिन्दू चिह्नों को मिटाया गया है।
5. मस्जिद की पश्चिमी दीवार पूरी तरह हिन्दू मंदिर का हिस्सा है।
6. सर्वे में 32 शिलापट और पत्थर मिले हैं, जो वहां पहले हिन्दू मंदिर होने के साक्ष्य हैं।
7. शिलापटों पर देवनागरी, तेलुगु और कन्नड में आलेख लिखे हैं।
8. एक शिलापट में जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर लिखा है, जबकि एक अन्य शिलापट में ‘महामुक्ति मंडप’ लिखा है।
9. मस्जिद के कई हिस्से में मंदिर के स्ट्रक्चर मिले हैं।
10. मस्जिद के निर्माण संबंधी एक शिलापट पर अंकित समय को मिटाने का प्रयास किया गया है।
वाराणसी जिला अदालत ने काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी परिसर में हुए सर्वे की रिपोर्ट को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट को पक्षकारों को सौंप दी। रिपोर्ट के मुताबिक ज्ञानवापी में मस्जिद की वर्तमान संरचना के निर्माण से पहले बड़ा हिन्दू मंदिर था।

