नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार यानी 1 फरवरी को अपना रिकॉर्ड नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जिसमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं। बजट 2026 को लेकर जहां एक ओर आम जनता को राहत की उम्मीद है, वहीं देशभर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में अहम घोषणा कर सकती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में देशभर में जीएसटी प्रणाली लागू की गई थी, लेकिन उस समय पेट्रोल और डीजल को इसके दायरे से बाहर रखा गया था। हालांकि तब से ही समय-समय पर इन दोनों ईंधनों को जीएसटी में शामिल करने की चर्चा होती रही है। अब बजट 2026-27 में इस दिशा में बड़ा कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
बजट 2026 में हो सकती है अहम घोषणा
वर्तमान में देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग-अलग हैं। औसतन पेट्रोल की कीमतें 95 रुपये से 105 रुपये प्रति लीटर के बीच हैं, जबकि डीजल के दाम 88 रुपये से 96 रुपये के आसपास बने हुए हैं। पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी टैक्स लगाती हैं, जिसमें राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट कीमतों को काफी प्रभावित करता है।
अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है। जीएसटी के अंतर्गत आने के बाद राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट समाप्त हो जाएगा और कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। इससे ईंधन की कीमतों में एकरूपता आने के साथ-साथ उपभोक्ताओं का बोझ भी कम हो सकता है।
जीएसटी में शामिल होने से क्या होगा फायदा
यदि वित्त मंत्री 1 फरवरी को पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की घोषणा करती हैं, तो इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। जीएसटी के तहत टैक्स व्यवस्था सरल होती है और टैक्स की दरें स्पष्ट होती हैं। वर्तमान में जीएसटी के तीन प्रमुख स्लैब हैं—5 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत (कुछ मामलों में सेस के साथ)। हालांकि पेट्रोल-डीजल को किस स्लैब में रखा जाएगा, यह सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।
पेट्रोलियम मंत्री के बयान से मिले संकेत
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में एक मीडिया संस्थान से बातचीत में कहा था कि सरकार उपभोक्ताओं पर बोझ कम रखने को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमत, टैक्स और राजस्व के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। बजट जैसे अवसरों पर नीतिगत फैसलों की गुंजाइश रहती है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि आगे चलकर तेल कंपनियां कीमतों में राहत देने पर विचार कर सकती हैं, बशर्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिर बना रहे।
क्यों हर राज्य में अलग-अलग हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई घटकों पर निर्भर करती हैं। इसमें ईंधन की बेसिक कीमत, डीलर का कमीशन, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट शामिल है। राज्यों में वैट की दरें अलग-अलग होने के कारण ईंधन के दामों में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है।


