स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को अपने खिलाफ दर्ज POCSO अधिनियम के तहत मामले को सरकार की एक चाल करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग से जनता का ध्यान हटाने के लिए की जा रही है।
स्वामी ने सरकार पर शंकराचार्यों पर “हमला” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में चार शंकराचार्य हैं, जिन्होंने हमेशा सनातन धर्म की रक्षा की है। अब सरकार उन्हें निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि सत्य कभी समाप्त नहीं होता और गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कथित POCSO मामले में जिन अन्य आरोपियों की चर्चा हो रही है, उनका उनके गुरुकुल से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि जिन छात्रों का नाम लिया जा रहा है, वे उनके संस्थान से जुड़े ही नहीं हैं।
इस बीच सोमवार सुबह उत्तर प्रदेश पुलिस कथित यौन उत्पीड़न मामले में पूछताछ के लिए उनके आवास पहुंची। मीडिया से बातचीत में स्वामी ने कहा कि वे पुलिस का किसी भी तरह से विरोध नहीं करेंगे और जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनके लिए तीन “अदालतें” हैं। पहली अदालत जनता है, जो सब कुछ देख रही है और अपना निर्णय देगी। दूसरी अदालत उनकी अंतरात्मा है, जो सही और गलत का फैसला करती है। तीसरी और सर्वोच्च अदालत भगवान हैं, जो सब देख रहे हैं।
स्वामी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी कथित सीडी का दावा किया जा रहा है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इन सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे।

